परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..दीपासंजय*दीप*

प्रदूषण नाम का धीमा जहर  हवा, पानी, धूल आदि के माध्यम से मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर उसे रुग्ण बना देता है।पर्यावरण संसाधनों के अंधाधुंध उपयोग से हमने पारिस्थितिक संतुलन को काफ़ी हद तक […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..अशोक सपड़ा

गर कोई मुझसे ये पूछे कि प्रदूषण के लिए क्या हम ही जिम्मेदार है और कितने तो मेरा जवाब यही होगा हाँ हम ही इसके लिये सबसे बड़े जिम्मेदार भी है और अब इसको कम […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..रेखा दुबे

‘आधुनिकता की ओर अमोघ गति से दौड़ता भारत कब आ गया पर्यावरण प्रदूषण की चपेट में पता ही नहीं चला”,कई लोगों के मन में प्रशन उठता है आखिर यह पर्यावरण प्रदूषण क्या है,क्यों होता है […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..चन्द्रकांता सिवाल चन्द्रेश

मानव जीवन में अगर देखा जाय तो पर्यावरण का विशेष महत्व है, पर्यावरण से हमारा तात्प्रय वह स्थान जहाँ हम रहते हैं जिस वायु में हम सांस लेते हैं, हमारे आस पास का वह परिवेश […] Read More

‘राष्ट्रीय कवि संगम’ द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन एवं बिहार इकाई का गठन

पटना। दिनांक 28 जनवरी 2018 (रविवार) को सामुदायिक भवन, शिवपुरी, अनीसाबाद में ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ के तत्वाधान में प्रथम बार बिहार में आयोजित कवि सम्मेलन में पटना समेत कई जिलों के 50 से भी अधिक […] Read More

साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों का सम्मेलन सम्पन्न

हिंदी भवन भोपाल के महादेवी वर्मा सभाकक्ष में आज साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों का सम्मेलन ,उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रविन्द्र शुक्ल, के मुख्य आतिथ्य,एवम डॉ देवेंद्र दीपक ,निदेशक, निराला सृजन पीठ,की अध्यक्षता […] Read More

लघुकथा “विचारों का दैत्य”-: रेखा दुबे

सुलभा जैसे ही ड्राइंग रूम में चाय लेकर पहुँची,भागवत कथा वाचक रामनारायण शास्री जी पति के साथ बैठे हुए उत्साह से अपनी बात कहने में व्यस्त थे,बिषय था गिरधर शास्त्री के बेटे का विवाह जो […] Read More

ग्रीन इंडिया “वृक्षरोपण लक्ष्य हमारा” का हुआ आयोजन

ग्रीन इंडिया “वृक्षरोपण लक्ष्य हमारा ” 26जनवरी 2018को 69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इलाहाबाद के रेलवे के लोकोपायलट एवं गार्ड के रनिंग रुम मे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ एक नई पहल ग्रीन इंडिया […] Read More

गणतन्‍त्र दिवस पर लता के दो पुष्‍प।

नैतिकता का अवमूल्यन नैतिकता का अवमूल्यन है निकला इसका अर्क है। है स्वतंत्र पर भारत माँ का जैसे बेड़ा गर्क है । । बेच दिया है नैतिकता को कपटी कुटिल लुटेरों ने, कैद हो गई […] Read More

कविता-शहीदों में कही, ”दीपा संजय “दीप”

शहीदों में कहीं मेरा,अभी नाम बाकी है। कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम बाकी है।   अमन की राह चल के जो, बुलन्दी हमने पाई है। अलग छवि विश्व में अपनी,हमने बनाई है। वतन […] Read More