आ जा पी ले भंग भायला- विश्वम्भर पाण्डेय ‘व्यग्र’

आ जा पी ले भंग भायला होड़ी  खैल्यां संग भायला एक के दो दो दीखे मोकूं कैसी  दे  दई  भंग भायला तन मन दोनूं रंग जावेला मत कर मोकूं तंग भायला अनूठो  देवर-भाभी  रिश्तो घर-घर […] Read More

डाक विभाग ने 202 गाँवों को बनाया शत-प्रतिशत सुकन्या समृद्धि ग्राम

आज का दौर बेटियों का है। बेटियाँ समाज में नित नये मुकाम हासिल कर रही हैं। बेटियाँ पढेंगी तो बेटियां बढ़ेंगी, पर इसके लिए जरुरी है कि उनकी उच्च शिक्षा के लिए पर्याप्त प्रबंध किये जाएँ। ‘बेटी […] Read More

जीवन का सफर-मुस्कान चाँदनी

जीवन के सफर में कितने अकेले है हम भीड़ तो लगी है चारो तरफ पर मायूस खड़े हैं हम तन्हाईयों में लिपटी हुई, है मेरी राते खामोश लवो से निकल रही है आहें कितने मजबूर […] Read More

होली आई-गोपाल कौशल

 होली आई जंगल के राजा शेर  ने एक सभा बुलाई । प्रहलाद की भक्ति व होली की बात बताई ।। खेलेगे जमकर कल होली हम  सब भाई । द्वेषता – नफरत  से सदा मुसीबत आई […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..श्रीमती हंसा शुक्‍ला

पर्यावरण प्रदूषण के लिये सरकार, निगम, उद्योग, कारखाना या दूसरों को दोषी ठहराने से पहले हमें स्‍वआकलन करना हो कि पर्यावरण के लिए हम स्‍वयं कितने जिम्‍मेदार हैं। निम्‍न कार्यो को अगर हम ईमानदारी से […] Read More

आयोजन 5 परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम के ”प्रतिभागी”

300साहित्‍यकारों की दुनिया पोर्टल पर होने वाले पाक्षिक आयोजन के जनवरी द्वितीय आयोजन संख्‍या -5 में इस बार परिचर्चा का विषय था कितनें जिम्‍मेदार हैं हम पर्यावरण प्रदूषण के लिए, इस बार कुल 9 प्रविष्टियाँ […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..रीता जयहिंद हाथरसी

ये एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है कि हम कितने जिम्मेदार है पर्यावरण प्रदूषण के लिए ,,,सबसे पहले मेरे विचार से कि हम ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं क्योंकि मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है ईश्वर […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..संजय वर्मा “दॄष्टि “

कितने जिम्‍मेदार हैं हम पर्यावरण प्रदूषण के लिए ऋतुओं में आने लगे बदलाव से अनेक चिंतनीय प्रश्न खड़े हुए है | मौसमों में ज्यादा बदलाव यानि अधिक गर्मी और ठंड |क्या ,मौसम के निर्धारित माह अपने […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..विजयानंद विजय

हम लाख कहें खुद को ज्ञानी हम दंभ भरें मानवता का। हैं काट रहे उस डाली को जिस पर बैठे हैं आज सभी। इस पर्यावरण को अगर किसी ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुँचाया है, तो […] Read More

परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..डा०भारती वर्मा बौड़ाई

       प्रकृति से निरंतर लेते रहने की मनुष्य की प्रवृत्ति के कारण आज कई विषय चिंतनीय ही नहीं बल्कि चिंता का कारण बन गए है। पर्यावरण को बचाना एक अहम मुद्दा है हम […] Read More