‘राष्ट्रीय कवि संगम’ द्वारा कवि सम्मेलन का आयोजन एवं बिहार इकाई का गठन

पटना। दिनांक 28 जनवरी 2018 (रविवार) को सामुदायिक भवन, शिवपुरी, अनीसाबाद में ‘राष्ट्रीय कवि संगम’ के तत्वाधान में प्रथम बार बिहार में आयोजित कवि सम्मेलन में पटना समेत कई जिलों के 50 से भी अधिक […] Read More

साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों का सम्मेलन सम्पन्न

हिंदी भवन भोपाल के महादेवी वर्मा सभाकक्ष में आज साहित्यिक पत्रिकाओं के सम्पादकों का सम्मेलन ,उत्तर प्रदेश के पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ रविन्द्र शुक्ल, के मुख्य आतिथ्य,एवम डॉ देवेंद्र दीपक ,निदेशक, निराला सृजन पीठ,की अध्यक्षता […] Read More

लघुकथा “विचारों का दैत्य”-: रेखा दुबे

सुलभा जैसे ही ड्राइंग रूम में चाय लेकर पहुँची,भागवत कथा वाचक रामनारायण शास्री जी पति के साथ बैठे हुए उत्साह से अपनी बात कहने में व्यस्त थे,बिषय था गिरधर शास्त्री के बेटे का विवाह जो […] Read More

ग्रीन इंडिया “वृक्षरोपण लक्ष्य हमारा” का हुआ आयोजन

ग्रीन इंडिया “वृक्षरोपण लक्ष्य हमारा ” 26जनवरी 2018को 69वें गणतंत्र दिवस के मौके पर इलाहाबाद के रेलवे के लोकोपायलट एवं गार्ड के रनिंग रुम मे सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ साथ एक नई पहल ग्रीन इंडिया […] Read More

गणतन्‍त्र दिवस पर लता के दो पुष्‍प।

नैतिकता का अवमूल्यन नैतिकता का अवमूल्यन है निकला इसका अर्क है। है स्वतंत्र पर भारत माँ का जैसे बेड़ा गर्क है । । बेच दिया है नैतिकता को कपटी कुटिल लुटेरों ने, कैद हो गई […] Read More

कविता-शहीदों में कही, ”दीपा संजय “दीप”

शहीदों में कहीं मेरा,अभी नाम बाकी है। कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम बाकी है।   अमन की राह चल के जो, बुलन्दी हमने पाई है। अलग छवि विश्व में अपनी,हमने बनाई है। वतन […] Read More

गणतन्‍त्र दिवस की तीन मन-मोहक तस्‍वीरें, आप भी भेजें।

गणतन्‍त्र दिवस की तीन मन-मोहक तस्‍वीरें, सौजन्‍य से श्रीमती कवियत्री सरिता सघंई कोहिनूर जी। आपके पास भ्‍ाी गण‍तन्‍त्र दिवस की ऐसी मनमोहक तस्‍वीरें हो तो हमें जरूर भेजें। हमारा पता है sahityakaronkiduniya@gmail.com या वास्‍टप 9451647845

फिर वही कोशिश- मुस्‍कान

फिर से कोशिश कर रही हूँ अरमानो के फूल खिलाने का फिजा में बहार लाने का जो उजड़ गया है मेरा चमन उसे बसाने का फिर से कोशिश कर रही हूँ दिल में जज्बात लाने […] Read More

पुस्तक समीक्षा : तार पर टँगी बूँदें : अवधेश कुमार ‘अवध’

वही कविता भविष्य की यात्रा तय कर पाती है जो हमारे जीवन से जुड़ी हो । उसके भाव हमारे दिल की उपज हो या दिल द्वारा ग्राह्य । जो सरलता, सहजता, सार्थकता, माधुर्य, प्रासाद एवं […] Read More

परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप?अवधेश कुमार ‘अवध’

‘भूख’ अपने आप में एक स्वाभाविक बीमारी है जिसकी अतृप्ति का नाम ‘तड़प’ है। इस तड़प को बिना रोक – टोक के ‘बेसहारा’ के यहाँ आश्रय मिलता है और अगर बेसहारा ‘औरत’ हो तो सोने […] Read More