परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” शिवानंद चौबे

कृषि प्रधान देश भारतवर्ष में यदि अन्नदाता ही आत्महत्या करने को विवश है तो निश्चय ही यह इस देश के लिए शर्मनाक बात है !हम शायद यह बात भूल जाते है की हम कितने भी […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी”

कुछ समय से सूखा की स्थिति बनी हुई है और फिर अभी हाल ही में बेमौसम बरसात एवं ओलों की मार से किसान पूरी तरह से टूट गया है उनकी पूरी फसलें बरबाद हो गयीं […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” धीरेन्द्र प्रताप सिंह।

भारत ने बीसवीं सदी के अंतिम दशक में हुए आर्थिक बदलावों (नई आर्थिक नीति-1991) से एक बहुत ही तेज रफ़्तार से इक्कीसवीं सदी में प्रवेश किया. इस तेज रफ़्तार ने सुविधा के नाम पर देश […] Read More

परिचर्चा- तड़पते किसान और सरकार ” रीता जयहिन्‍द” आयोजन संख्‍या -7

हमारे किसान जो कि कितनी कड़ी मेहनत से अन्नोपार्जन करते हैं ।खेतों में कड़ी धूप व बंजर जमीन को उपजाऊ करते हैं तब हम लोगों तक अन्न पहुँचता है। कितनी दुःखद बात है जिस किसान […] Read More

पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र का हुआ शुभारम्भ

नागौर में डाक विभाग और विदेश मंत्रालय के संयुक्त तत्वावधान में बहुप्रतीक्षित पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र का शुभारम्भ 25 फरवरी, 2018  को हुआ। नागौर के गाँधी चौक उपडाकघर  में इसका उद्घाटन श्री सी. आर. […] Read More

जो पाकिस्‍तान की करें पैरवी-अशोक सपड़ा

जो पाकिस्तान की पैरवी करें उन्हें भारत से भगाना होगा बहुत हुआ भाईचारा इन जैसों से ,इन्हें अब मिटाना होगा अब इनकी दहशतगर्दी से भरा अखबार नहीं खरीदेंगे हम सरेबाज़ार में इनकी गुंडागर्दी का बाज़ार […] Read More

डाक्‍टर मेनका की काव्‍यधारा।

स्त्रियाँ कागजों जैसी होती है! मोडो.. मुड़ जाती हैं! जला दो.. जल जाती है! गला दो.. गल जाती हैं! फाड़ दो.. फट जाती हैं! आमतौर पर रद्दी सी या पुराने अखबारों की तरह इस्तेमाल की […] Read More

आयोजक के दो शब्‍द – गो0रा0ग0अ0भ0सा0 सम्‍मेलन 2018

आयोजक के दो शब्‍द आप सभी को अखंड गहमरी /अखंड प्रताप सिंह का प्रणाम। विगत वर्षो की भाँति इस वर्ष भी भारत में जासूसी उपन्‍यास के जनक कहे जाने वाले प्रसिद्व उपन्‍यासकार गोपाल राम गहमी […] Read More

फागुन के फाग- डॉ दीपा मनीष व्यास

पिया मैं तेरे साथ लगा दे रंग हज़ार पर मेरा प्रिय रंग है लाल नैनों ने तुम्हें जब देखा था पहली बार उभर आया था कपोलो पर मेरा प्रिय रंग लाल अग्निकुण्ड के समक्ष जब […] Read More

फागुन के फाग – डॉ दिग्विजय कुमार शर्मा “द्रोण”

1.ब्रजनारि अरी घेरौ री ब्रजनारि, कन्हैया होरी खेलन आयो है, होरी खेलन आयो है, होरी खेलन आयो है, अरी घेरौ री .. संग में हैं आये उत्पाती बाल, मटक मटक चले अदा की चाल, हाथनु […] Read More