51 लोगो ने किया अंगदान और वस्त्रदान

नयी दिल्ली : प्रसिद्द समाजसेवी संस्था यश सेवा समिति के 51 सदस्यों ने आज श्री यशपाल भाटिया जी की स्मृति में नेत्रदान, देहदान, अंगदान का संकल्प लेकर 9 दिसम्बर,2017 को “संकल्प दिवस” के रूप में […] Read More

रुनू बरुवा का ‘श्रद्धार्घ’ है बेहतरीन -अवधेश कुमार ‘अवध’

पूर्वोत्तर के असम प्रान्त में हिन्दी भाषा व साहित्य की चर्चा डॉ. रुनू बरुवा द्वारा विरचित ‘श्रद्धार्घ’ के बिना पूरी नहीं हो सकती । बासठ वर्षीय कवयित्री द्वारा सन् 1962 से सन् 2005 तक के […] Read More

नहीं भूल पाऊंगा-अशोक दर्द

वो मंदिर में घंटियों की झंकार वो बूढ़ी आँखों का माँ सा प्यार वो घना हरियाता जंगल वो तोष – ठान्गी – और देवदार वो बच्चों – बूढ़ों – महिलाओं का प्रेम –आदर –सत्कार वो […] Read More

“लांघ कर अब तो आना होगा, कागज की दीवारों को”-कुमार अखिलेश

जंग नहीं हम लगने देगे, भारत की तलवारो को लांघ कर अब तो आना होगा, कागज की दीवारों को जो देखेगा स्वप्न यहाँ वो अपनी जिम्मेदारी पर मौन बना इल्जाम ना देगा, कोई अब सरकारों […] Read More

छाया त्रिपाठी के दो गीत

कह दो मीत कह दो मीत आज कुछ ऐसा हो जाये मन पहले जैसा। थम जाए नयनों का पानी रुके हृदय की भले रवानी नेह सुधा यों बरसाओ तुम हो जाए फिर चूनर धानी अगर […] Read More

रंगमंच से दूर होते युवा- रमा प्रवीर वर्मा

आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में युवा पीढ़ी जहाँ अपने कैरियर के प्रति ज्यादा जागरूक नजर आती है वहीँ उन में रंगमंच के प्रति उदासीनता दिखाई देती है | इसका मुख्य कारण ये है कि […] Read More

रंगमंच से दूर होते हुआ-सुधीर सिंह।

आज कल देखा यह जा रहा है।युवा हर कुछ ,सब कुछ पल में पा जाना चाहता है। वह शीघ्रता से हर कार्य कर रहा है। परिणाम की चिंता किये बगैर वह बस दौड़ लगा रहा […] Read More

रंगमंच से दूर होते युवा-ज्‍योति मिश्रा

रंगमंच वह पहला स्थान है, जहाँ कलाकार सही अर्थों में अपने अभिनय का प्रदर्शन कर सकता है। किंतु आजकल रंगमंच से “रंग” ही गायब हो चुका है,आज का युवा वर्ग सिर्फ एक ठोस धरातल पर […] Read More

श्रीमती वर्णाली बनर्जी: रंगमंच से दूर होते युवा

रंगमंच समाज का दर्पण हैं, जिसे कलाकार अभिनय कर प्रस्तुत करते हैं। रंगमंच के जरिए प्रदर्शन का मूल मकसद है कि समाज जागरूक हो और बुराइयां जड़ से साफ हों। जिस बात को कहने के […] Read More

‘मेरे गांव की चिनमुनकी’ विषयवस्तु की अभिव्यक्ति -डॉ. चित्रांशी

पुस्‍तक समीक्षा- साहित्य की गद्य तथा पद्य विधा में युवा गीतकार धीरज श्रीवास्तव ने पद्य विधा को आत्मसात् करते हुए अपनी मौलिक भावोद्भावना शक्ति की अलौकिक प्रतिभा-प्रकर्ष से चालीस गीतों का एक संग्रह ‘मेरे गांव […] Read More