गद्य विधाएं

माँ मेरा स्कूल -अनीता मिश्रा'”सिद्धि”‘

“उठ बेटा जल्दी से, स्कूल जाना है”। हीरा ने भोलू को उठाते हुए कहा।तुझे तैयार कर स्कूल छोड़ दूँगी, तभी तो काम पर जाऊँगी मैं ।हीरा एक छोटे से गाँव में रहती थी,और वही के […] Read More

लघुकथा “विचारों का दैत्य”-: रेखा दुबे

सुलभा जैसे ही ड्राइंग रूम में चाय लेकर पहुँची,भागवत कथा वाचक रामनारायण शास्री जी पति के साथ बैठे हुए उत्साह से अपनी बात कहने में व्यस्त थे,बिषय था गिरधर शास्त्री के बेटे का विवाह जो […] Read More

”दु‍निया खतों की” अनन्या गौड़

“ख़त को खोलो तो भाई ..ऐसे कब तक देखते रहोगे ।”मनन ने गुमसुम बैठे चिंतन से कहा । तू जा यहाँ से .. मेरा दिमाग़ मत खा ।संयत स्वर में बोला चिंतन ।अरे भाई तुम […] Read More

जीवन ‘लघुकथा’ डॉ.सरला सिंह

तेजी से पटरियों के बीच दौड़ती एक लड़की ट्रेन के किनारे पटरियों पर पड़े  पानी के बोतल उठा उठा कर अपने बोरे में भर रही थी ,कई बार गिर पड़ती ,फिर उठती संभलती और आगे […] Read More

आपका स्‍वागत है

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