काव्‍य विधाएं

कुम्भ स्नान बाद-मधु गौतम।

शिप्रा तट पर मैं, भाव शून्य खड़ा था। मैंने देखा कुम्भ बाद, कुछ पाप , घाट पर डल रहे थे। तो कुछ, सलिल संग चल रहे थे। कुछ पाप गल चुके थे पूरे तो कुछ […] Read More

नहीं भूल पाऊंगा-अशोक दर्द

वो मंदिर में घंटियों की झंकार वो बूढ़ी आँखों का माँ सा प्यार वो घना हरियाता जंगल वो तोष – ठान्गी – और देवदार वो बच्चों – बूढ़ों – महिलाओं का प्रेम –आदर –सत्कार वो […] Read More

“लांघ कर अब तो आना होगा, कागज की दीवारों को”-कुमार अखिलेश

जंग नहीं हम लगने देगे, भारत की तलवारो को लांघ कर अब तो आना होगा, कागज की दीवारों को जो देखेगा स्वप्न यहाँ वो अपनी जिम्मेदारी पर मौन बना इल्जाम ना देगा, कोई अब सरकारों […] Read More

छाया त्रिपाठी के दो गीत

कह दो मीत कह दो मीत आज कुछ ऐसा हो जाये मन पहले जैसा। थम जाए नयनों का पानी रुके हृदय की भले रवानी नेह सुधा यों बरसाओ तुम हो जाए फिर चूनर धानी अगर […] Read More

आपका स्‍वागत है

साहित्‍यकारों की दुनिया में आपका स्‍वागत है। आशा है कि आप अपना सहयोग बनायेंगें, और विषय वार अपना योगदान भी देगें।