काव्‍य विधाएं

वो मुझसे नज़रें-अशोक सपड़ा हमदर्द

वो मुझसे नज़रें चुराये तो क्या करूँ वो आँखों से ना पिलाये तो क्या करूँ रोज भूल जाती अक्सर मुझकों यारोँ एक भी दिन याद न रखें तो क्या करूँ अब दिल करता कि उसको […] Read More

जीवन का सफर-मुस्कान चाँदनी

जीवन के सफर में कितने अकेले है हम भीड़ तो लगी है चारो तरफ पर मायूस खड़े हैं हम तन्हाईयों में लिपटी हुई, है मेरी राते खामोश लवो से निकल रही है आहें कितने मजबूर […] Read More

गणतन्‍त्र दिवस पर लता के दो पुष्‍प।

नैतिकता का अवमूल्यन नैतिकता का अवमूल्यन है निकला इसका अर्क है। है स्वतंत्र पर भारत माँ का जैसे बेड़ा गर्क है । । बेच दिया है नैतिकता को कपटी कुटिल लुटेरों ने, कैद हो गई […] Read More

कविता-शहीदों में कही, ”दीपा संजय “दीप”

शहीदों में कहीं मेरा,अभी नाम बाकी है। कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम बाकी है।   अमन की राह चल के जो, बुलन्दी हमने पाई है। अलग छवि विश्व में अपनी,हमने बनाई है। वतन […] Read More

फिर वही कोशिश- मुस्‍कान

फिर से कोशिश कर रही हूँ अरमानो के फूल खिलाने का फिजा में बहार लाने का जो उजड़ गया है मेरा चमन उसे बसाने का फिर से कोशिश कर रही हूँ दिल में जज्बात लाने […] Read More

नारी एक : रूप अनेक– राहुल प्रसाद

बेटी से ही रोशन घर है बेटी से ही ख़ुशी है घर की बेटी से ही रौनक घर में बेटी से ही हंसी है घर की मदर टेरेसा बनकर बेटी शान्तिरूप बन जाती हैं लक्ष्मीबाई […] Read More

सैनिक के अंतर मन की आवाज- धाकड़

वो माँ का प्यार ,वो ममता मैं सब कुछ  छोड़ आया हूँ। जमाने से बगावत कर मैं तेरे पास आया हूँ।। कोई दुश्मन न जन्मेगा तेरे बेटे केे डर से माँ । तुम्हारी आन के […] Read More

लाल लाईट-गोपाल कौशल

नटखट बंदर चला बजार मम्मी से लेकर रुपये चार । मिठाई देख मन ललचाया झटपट करने लगा सडक पार ।। लाल लाईट थी देख न पाया टक्कर  मार  गई  एक  कार । गिरा बीच सडक […] Read More

गीत-डा मोहन तिवारी आनंद

कैसी भी मजबूरी आवे फिर भी कभी धैयॆ न खोना। दुनिया कुछ भी कहे किन्तु तुम सदा प्यार की फसलें बोना।। स्वारथ अहंकार विष बेलें हरदम रहना इनसे दूर। आज आदमी अंधा होकर भटका सत्कर्मों […] Read More

माँ तेरा आंचल है-गोपाल कौशल

चंद्र-सी शीतल तेरी गोदी   बिंदु – सा लेटा हुआ हूँ मैं ।।   तेरे नाम पर लगा चंद्र बिंदु   अब समझ में आ गया माँ ।।” किससे  सुनूँ माँ ,आज फिर वो लोरी […] Read More