सैनिक के अंतर मन की आवाज- धाकड़
वो माँ का प्यार ,वो ममता मैं सब कुछ  छोड़ आया हूँ।
जमाने से बगावत कर मैं तेरे पास आया हूँ।।
कोई दुश्मन न जन्मेगा तेरे बेटे केे डर से माँ ।
तुम्हारी आन के खातिर मैं, सब कुछ छोड़ आया हूँ।।
तुम्ही होली,तुम्ही,बंधन, तुम्ही ,दीपावली हो माँ।
तुम्हारी शान के खातिर ,कफन ये ओढ़ आया हूँ।।
मेरा ये मन समर्पित माँ,मेरा ये तन समर्पित है।
मेरा जीवन तुम्ही पे माँ ,समर्पित करने आया हूँ।।
अगर मैं मर भी जाऊ माँ, तिरंगा,ही कफन देना।
वतन ही शान है, मेरी ,मेरी माँ से कह आया हूँ।।

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