लाल लाईट-गोपाल कौशल
नटखट बंदर चला बजार
मम्मी से लेकर रुपये चार ।
मिठाई देख मन ललचाया
झटपट करने लगा सडक पार ।।
लाल लाईट थी देख न पाया
टक्कर  मार  गई  एक  कार ।
गिरा बीच सडक पर धडाम
करने लगा हाय राम….राम ।।
बच्चों तुम भी रहो होशियार
जब भी करो सडक को पार ।
दाएं-बाएं  देखों,सिग्नल देखो
फिर करो तुम सडक को पार ।।
            गोपाल कौशल
          सहायक अध्यापक
     नागदा जिला धार मध्यप्रदेश
           99814-67300
     रोज एक -नई कविता 1655

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