बंद होता पुस्तक बाजार, कारण और निवार पर साहित्‍यकारों की राय।

साहित्‍यकारों की धरती पत्रिका के बेवपेज पर होने वाली पाक्षिक परचिर्चा अंक-/ में इस बार का विषय था, बंद होता पुस्‍तक बाजार, जिसमें लेखको ने अपनी बात सात सौ अक्षरों में  रखी। सारे आलेख गागर में सागर जैसे लगते है। इस बार इस प्रतियोगिता में कई साहित्‍यकारों ने हिस्‍सा लिया। आईखे देखते हैं किस ने क्‍या लिख। इस परिचर्चा में तीन विजेताओं की मिलता है प्रमाण प्रदान किया जाता है। आप इस विषय पर अपने विचार लिख सकते हैं। इस बार की परिचर्चा होगा।

मेरी बेटी सबसे न्‍यारी। 700शब्‍दोंमेंअपनी बात लिखें

 

 

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