बंद होता पुस्तक बाजार, कारण और निवारण ::नमिता दुबे
आज कल के माहौल में देखनें में आ रहा है कि युवा किताब पढ़नें में उतनी रूची नहीं रखते | किताब पढ़नें से ज्यादा उन्हें चलचित्र या दृश्यात्मक माध्यम ज्यादा भाते है | आज कल मोबाईल हर व्यक्ति के पास है और उसमें इन्टरनेट | इन्टरनेट के माध्यम से लोग पूरी दुनियां से जुड गये है | पलक झपकते ही बटन के माध्यम से सारी जानकारी सामनें हाजिर हो जाती है | और व्यक्ति मन चाही पढाई और किताब सब कुछ नेट के माध्यम से प्राप्त कर लेता है |जब केवल थोडी़ सर्च से सारी जानकारी आसानी से उपलब्ध है तो किताबों में सर्च करनें की जगह बटन दबाना ज्यादा आसान है |किताबों में रूची पहले भी केवल 20% लोगो को थी |आज भी वही हालात है |कुछ लोग स्वयं को बुद्धीजीवी कहलानें के लिये बहुत सी किताबे खरीद कर रख लेते है पर पढते नहीं है | वहीं कुछ लोग जो सही मायनें में किताब पढना चाहते है उन्हें खरीद नहीं पाते | किताबों का महंगा प्रकाशन उनका प्रचार ये सब बहुत कीमती हो गया है | जिस वजह से अच्छा साहित्य लिखा तो जा रहा है पर प्रकाशित नहीं हो पा रहा | यदि होता भी है तो ग्राहक नहीं मिल पाते |
आज कल एक चीज और देखनें में आ रही है |किसी गरीब व्यक्ति से अमीर लोग उसका साहित्य कुछ कीमत में खरीद अपनें नाम से छपवा लेते है | और स्टेज पर पुरस्कार प्राप्त करते सम्मान होते नाम कमा लेते है और वास्तविक लेखक वंचित रहता है|राजनीति भी पुस्तक बाजार बन्द होने की एक वजह है |
लोग मौजुदा नेताओ पर लिखते है और परिचितों द्वारा उसे खरीदनें पर जोर देते है | पर वास्तविक लेखक तक आलोचना और समालोचना के सिये पुस्तक नहीं पहुंच पाती | पुस्तक की दुनिया संकुचित होती जा रही है | और आज के बाजारीकरण में पुस्तक मात खा रहीं है |अपनें मूल उद्देश्य से भटकी जा रही है |
 ऐसे ही बहुत से कारण है कि पुस्तक बाजार बन्द होनें के कगार पर खडा़ है |इसके निवारण के लिये समुचित कदम उठानें की आवश्यकता है |किताब की छपाई के लिये ऐसी योजनायें बननी चाहिये कि वास्तविक लेखक शब्दों के माध्यम से आम आदमी तक पहुंच सके | किताब खरीदना और छपवाना दोनों वाजिब दामों में होना चाहिये | लोगों तक किताब पहुंचे और प्रतिक्रिया भी आनी चाहिये |  बच्चों में फोटो के माध्यम से पढाई की रूचि जगाना जरूरी है |अन्यथा पढाई की किताबों के अलाबा लोग साहित्य की किताबे नहीं पढे़ंगे |जब पढनें वाले ही नहीं होंगे तो किताबे छपेगी किसके लिये |किताब बाजार तो बन्द होगे ही |||

1 thought on “बंद होता पुस्तक बाजार, कारण और निवारण ::नमिता दुबे”

  1. रीता जयहिंद अरोड़ा कहते हैं:

    नाइस लेखन

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