बंद होता पुस्तक बाज़ार, कारण और निवारण:-ज्‍योति मिश्रा

ज्‍योति मिश्रा

आज छपी हुई पुस्तकों का बाज़ार मंदी पर है, इसकी स्थिति अच्छी नहीं, पिछले साल जर्मन किताब उद्योग ने सिर्फ 10 अरब यूरो का कारोबार किया था, सात साल में पहली बार ऐसा हुआ,
आज पुस्तकों का बाजार कम हो रहा है , कारण है ‘ई बुक” लगातार ऐसे लेखकों की संख्या बढ़ती जा रही है, जो छपी-छपाई पुस्तक के साथ डिजिटल किताब भी जारी करते हैं, अपनी किताबों का टेक्स्ट खुद ही इंटरनेट पर जारी कर देते हैं।
अमेज़ॉन जैसे इंटरनेट पुस्तक भंडारों की संख्या बढ़ती जाने के कारण भी बड़ी बड़ी किताबों की दुकानें खत्म होने की कगार पर हैं। हालांकि डिजिटल चुनौती पारंपरिक छपी हुई किताबों के लिए एक बड़ा झटका है। पुराने प्रकाशकों को नए रास्ते अपनाने की आवश्यकता है।
भारत में रीसाइकल्ड पेपर का बाजार बढ़ रहा है, और पाठक अच्छे कागज़ पर छपी किताबें पढ़ना पसंद करते हैं, और इनके लिए ताजे पेपर का उपयोग करना पड़ता है, साहित्य की किताबें और पत्रिकाएं इसी तरह के कागज़ पर छपती हैं। आज पेड़ों की कटाई को लेकर भी ई बुक अपनी सफलता के झंडे गाड़ रही है और पुस्तक बाजार पर खतरा मँडरा रहा है।।
किन्तु एक बात और कहना चाहूँगी कि आज भी पुस्तक पढ़ने वाले लोग हैं, जो खोजते हैं अच्छी पुस्तकें, जो भटकते हैं दिल्ली के संडे बुक मार्किट में और लगने वाले पुस्तक मेले में।

4 thoughts on “बंद होता पुस्तक बाज़ार, कारण और निवारण:-ज्‍योति मिश्रा”

  1. रीता जयहिंद अरोड़ा कहते हैं:

    अति सुंदर

  2. Dines Prajapati कहते हैं:

    It is sadly true that books & all other print media is loosing it’s market but it has nothing to do with liking of booka. Technology is changing many things very fast with it’s evolution. Now we moving very fast in electronic era certainly many practices & traditions will be eroded

  3. आशुकवि नीरज थी कहते हैं:

    बहुत ही सुंदर

  4. नीरजा मेहता कहते हैं:

    बहुत सुंदर आलेख ज्योति सखी

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