बंद होता पुस्तक बाजार,कारण और निवारण:- रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

समय जैसे जैसे आगे बढता गया वैसे वैसे लोगों के अन्दर की सोच बदलती गई उसी प्रकार लोगों की कल्पना शक्ति का विकास हुआ।इसी का परिणाम सभी लोगों के अन्दर आधुनिकतावाद का खुमार चढते गया। यही पे सिलसिला शुरू होता है एक नये युग का जब एक दूसरे के यहां तक अपने विचार को पहुचाने हेतु लेखन विधा अपनाईं गई,इन्हें ही संग्रह कर आने वाले पीढ़ियों के लिए रखने की व्यवस्था बनाई गयी, जीसे पुस्तक का रुप दिया गया। इन्हें सुरक्षा प्रदान हेतु जहां तहां पुस्तकालय का निर्माण जनहित में किया गया। जिससे असंख्य लोगों को इसका लाभ मिलता रहा है।धीरे धीरे वैज्ञानिक युग में प्रकाशन की मदद से निजी तौर पे पुस्तकें छपने लगी। जिसके कारण लोगों को व्यक्तिगत रुप से पुस्तक का क्रय-विक्रय का शुभ अवसर प्रदान हुआ और बाजारों में उपलब्ध होने लगी। आज इसी की देन है कि पुस्तक मेला, पुस्तक भण्डार, पुस्तक बाजार इत्यादि का सर्वाधिक विकास हुआ। इन बाजारों का दिनप्रतिदिन क्षय हो रहा है।अगर बन्द होता पुस्तक बाजार के कारणों की चर्चा की जाय तो सामने बहुत से तथ्य उभर कर आते हैं। मनुष्य का सुविधा भोगी होना। आज का मनुष्य इतना सुविधाभोगी हो गया है कि सुविधा के आगे भविष्य को अंधकार में धकेलते हुए आगे बढ रहा है कोई भी पुस्तक खरिद कर पास में रखना नहीं चाहता। और जब खरीद-बिक्री नहीं होगी तो पुस्तक बाजार धीरे धीरे बन्द नजर आयेंगे। इन्टरनेट की दुनिया का तेजी से आगे बढना भी एक कारण है जो पुस्तक बाजार को प्रभावित कर रहा है।बहुत से पाठक गण इपत्रिका इबुक से अध्ययन का काम कर रहे हेंं।यहाँ तक की कक्षाएं भी इन्टरनेट से चलना प्रारंभ हो गई है। इसके वजह से पुस्तकों की ओर पाठकों का रुझान कम होना शुरु हो गया है।
देखा जा रहा है कि शैक्षणिक कार्यक्रम के पाठ्यक्रम का संक्षेपण शुरू हो गया है जिसके वजह से लोगों में गहन अध्ययन की कमी नजर आ रही है जिसका सीधा प्रभाव पुस्तक बाजार पर पड़ेगा। इतना ही नहीं बल्कि पुस्तकालयों के विस्तार में भी कमी आई है। इतना ही नहीं आज का आर्थिक युग भी पुस्तक बाजार को प्रभावित कर रहा है इस अर्थ युग में अर्थ जुटाने में लोग अन्धे बनते जा रहे हैं उन्हें समय ही नहीं मिलता कि वे पुस्तकों को पढकर सामाजिक,आर्थिक,राजनैतिक ज्ञान प्राप्त कर सके।
निवारण के रुप में कुछ बातों पर गौर किया जाय तो शायद उपर्युक्त कारणों का समाधान किया जा सकता है। जीवन में पुस्तक का महत्व क्या है इसकी जानकारी विद्यार्थी स्तर से वयस्क स्तर तक प्रचार प्रसार किया जा सकता है जिससे लोगों में पुस्तक पढने की रुचि बढेगी और लोगों का रुझान पुस्तक की ओर होगा जिसका सीधा प्रभाव पुस्तक बाजार पर पड़ेगा।पुस्तक है तभी इन्टर नेट है ! लोगों तक पहुंचाना। यह मेरा मानना है। क्योंकि प्रचीन काल में इन्टरनेट नहीं था उस समय लोग पुस्तक का ही अध्ययन किया करतें थे। पुस्तकालय का निर्माण उसी समय की देन है। इसी पुस्तकालयों से बहुत से लोग अध्ययन करके ही आज के दौर का निर्माण किया।इस प्रकार पुस्तक है तभी इन्टरनेट है लोगों को बतलाने पर पुस्तक प्रेमियों की संख्या बढ सकती है इसका सीधा असर पुस्तक बाजार पर पड़ेगा।
विद्यालयों में पुस्तक के महत्व पर चर्चा करवाना। अगर सभी विद्यालयों में कार्यक्रम के तहत पुस्तक के महत्व पर बीच बीच में चर्चा की जाय तो पुस्तक बाज़ार को प्रभावित कर सकता है।उपर्युक्त तथ्यों का अध्ययन करने पर पता चलता है कि पुस्तक का बन्द होता बाजार के कारण तेजी से विकास का दौर है लेकिन इसी में अगर ध्यान दिया जाय तो विकास के साथ साथ पुस्तक का बन्द होता बाजार,बन्द होने के वजाय विकास के साथ साथ तेजी बढने लगेगा। इस प्रकार से कारण के साथ-साथ निवारण भी बस लोगों का पुस्तक की ओर ध्यानाकर्षित करने की जरुरत है।

(माध्यमिक शिक्षक बिहार सरकार)
कान्हपुर कर्मनाशा कैमूर बिहार -८२११०५
मोबाइल -9572289410/9473000080
रचना काल-16-12-2017

1 thought on “बंद होता पुस्तक बाजार,कारण और निवारण:- रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’”

  1. जय प्रकाश निराला कहते हैं:

    बहुत ही सुंदर तरीके से बताया आपने सर।

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