”अपराधी कौन?” भभुआ से रमेश कुमार का आलेख

आज के लोकतंत्र में जनता चुनकर जन प्रतिनिधि भेजती है अपने एवं देश के कल्याण हेतु, लेकिन वे जन प्रतिनिधि खुद वहा जाकर जन कल्याण न करके अपने हित की बात करने लगते हैं। अपने सुख- सुविधा से सम्बन्धित कानून बनाते हैं।इतना ही नहीं बल्कि उस कानून का उल्लंघन भी करतें हैं। यहाँ तक कि कानून के रखवाले भी कानून का उल्लंघन करतें हैं। अगर वे बहुत बड़ा अपराध भी करतें हैं तो खुलेआम बाहर घूमते हैं यह आम जनता सरकार सब जानती हैं।और संयोग से अगर किसी पार्टी से हो गये तो धीरे -धीरे उनका अपराध भी समाप्त हो जाता है।पता नहीं हमारे देश का कानून सही है या कानून के अधीन रहनेवाले लोग सही है।आज क्या हो रहा है पता नहीं पैसा कानून पर भारी है या कानून पैसा पर भारी है।एक गरीब जनता एक हत्या कर देता है और प्रूफ हो जाता है।तो हमारे देश में या तो उसे आजीवन कारावास या फांसी पर टाक दिया जाता है ,एक पैसे वाला वहीं गलती करता है या उससे भी बड़ा जधन्य अपराध भी करता है ।वो बाहर इतमीनान से घूमते फिरते रहते है और उसकी सजा फांसी और आजीवन कारावास के मुताबिक बहुत कम सजा दी जाती है।
इनको सजा देने वाले कौन है इनपर जांच कर धारा लगाने वाले कौन है ? एक आम आदमी आज के समय में पुलिस स्टेशन जाता है तो उसे डाटकर भगा दिया जाता है उसकी एफ आई आर दर्ज नहीं की जाती। वहीं दूसरी ओर देखें एक ओहदे वाले पैसे वाले अगर जातें हैं तो उन्हें बैठाकर जलपान कराया जाता है इतना ही नहीं बल्कि उनकी झूठी एफ आई आर दर्ज कर ली जाती है। और त्वरित कार्यवाही भी की जाती है। आखिर ऐसा क्यों?? जनता सरकार बनाती है सर्वजन हिताय के लिए, सरकार अपने यहा अलग-अलग विभाग बनायी है जनता की देख-रेख करने के लिए साथ में देश का विकास करने के लिए। लेकिन यहाँ जनता की कम और अपनी सुख-सुविधा ज्यादा ध्यान में रखा जाता है। यही वजह है लूट घसोट भ्रष्टाचार की जड़ जम गई पता नहीं इसकी शुरुआत उपर से या नीचे से है । कहा जाता है लोकतंत्र आजाद होने का प्रतीक है और इस आजाद भारत में बहुत से ऐसे लोग हैं जो परतंत्रता महसूस कर रहे हैं, ही नहीं बल्कि गुलामी भरा जीवन व्यतीत करने पर मजबूर हैं। कौन दोषी है?जनता जन प्रतिनिधि बनाकर भेजती देश चलाने के लिए ये बैठकर कानून बनाते हैं पता नहीं संविधान की जानकारी है या नहीं।उसी कानून और नियम के तहत सरकार छोटे -छोटे कर्मचारी से लेकर बड़े-बड़े अधिकारी तक बहाल करती है जनता की सेवा करने के लिए लेकिन ज्यादातर ये लोग रक्षा कम शोषण ज्यादा करते हैं। पता नहीं जनप्रतिनिधि जानते हैं या जानते हुए नजरअंदाज करते हैं।अब यह बात सामने आती है कि जनता दोषी है या जनप्रतिनिधि या सरकार के द्वारा बहाल किये गए कर्मी, अगर हम एक तरफ देखें ,जनता को दोषी ठहराते हैं तो हमारी सरकार बरी हो जाती है। दूसरी तरफ देखें,जनता को दोष कैसे दें ,ये तो आम जनता है सिर्फ सरकार बनाना जानती हैं और उनके बनाई गई लिक पर चलना जानते हैं।इन्हें क्या पता कि उस रास्ते पर क्या है ये तो धैर्य और विश्वास पर किसी को चुनकर भेजते हैं। इन्हें क्या पता हमारे विश्वास का खून कर दिया जायेगा । और सरकार को हम दोष दें नहीं सकते क्योंकि उन्हें दोष देना या न देना कोई फर्क नहीं पड़ता क्योंकि सरकार के कर्मचारी सरकार के नेता अधिकारी अगर गलती करतें हैं, तो जो उसमें निम्नश्रेणी के होते हैं उन्हीं पर कार्रवाई होती है और लोग दोषी पाये जाने के बाद भी इतमीनान से चैन की निंद मारते हैं। बड़े -बड़े नेता, बड़ी-बड़ी घटनाएं करके और बड़े-बड़े अधिकारी भ्रष्टाचार में संलिप्त होते हुए या तो बाहर घुम रहे हैं या नाम मात्र की सजा काटकर वापस सरकार के आदमी बन गये । एक बार मैं पढा था पेपर में किसी मीडिया के द्वारा सर्वे किया गया था लगभग ५०% लोकसभा राज्यसभा के सदस्यों के उपर किसी न किसी प्रकार का एफआईआर है और कोर्ट में लम्बीत है। उस समय के सरकार के द्वारा ये भी कहा गया था कि इन सभी लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। शायद कानून बनाने वाले ही थे इसलिए कानून को ही बदल दिए तभी आजतक कुछ नहीं हुआ।यही अगर कोई सरकारी नौकरी में निम्न वर्गीय कर्मी होते या कोई गरीब आम जनता होती तो कितनों को कारावास से लेकर कई बरस तक सजा सुना दी गई होती ओर उसे उस पद से पदच्युत कर दिया जाता।क्या माजरा है एक तरफ जनता सरकार को बनाती है सरकार जनता के लिए कार्य करने की सपथ लेती है और वह सपथ मात्र दिखावा होता है,छलवा होता है।तो यहाँ सरकार के लोग सरकार के अंग दोषी होते हैं। लेकिन दूसरे तरफ नजर डालते हैं सरकार बनाने के लिए जनता कुछ गलत लोगों का चयन कर उपर तक पहुंचा देती है। अपना फरिश्ता समझकर ,तो यहा जनता दोषी है। तीसरी तरफ कुछ लोग गरीब तबके के लोगों को डराकर धमका कर उनसे वोट जबरन लेकर खुद देश का नेता बनकर देशसेवा करने चलते हैं । ऐसे में नेता या गरीब जनता दोषी है। इस प्रकार से आज हमारे देश में अपराधी कौन है पता नहीं चलता है।अपराध कोई और करता सजा कोई और काटता है।
©रमेश कुमार सिंह “रुद्र”
रचना काल -: 08-09-2016

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