रंगमंच से दूर होते युवा- रमा प्रवीर वर्मा

रमा प्रवीण वर्मा

आज के प्रतिस्पर्धा के दौर में युवा पीढ़ी जहाँ अपने कैरियर के प्रति ज्यादा जागरूक नजर आती है वहीँ उन में रंगमंच के प्रति उदासीनता दिखाई देती है | इसका मुख्य कारण ये है कि न तो रंगमंच के क्षेत्र में कैरियर बनाया जा सकता है और न ही जीविकोपार्जन के लिए अर्थ की प्राप्ति हो सकती है | एक तरफ जहाँ बड़े पर्दे पर काम करने वाले कलाकार पैसा भी अच्छा कमाते हैं और नाम भी , वहीँ एक रंगकर्मी को रंगमंच से न तो उचित पारिश्रमिक मिलता है और न ही नाम | इसीलिए युवा पीढ़ी बड़े परदे की चकाचोंध की तरफ ज्यादा आकर्षित दिखाई देती है क्योंकि वहाँ पैसा भी है और नाम भी | आज कि युवा पीढ़ी कम समय में अधिक से अधिक धनोपार्जन करने को ज्यादा प्राथमिकता देती है | देखा गया है कि सभी रंगकर्मी नौकरी पेशा होते हैं और अपने काम के बाद वो रंगमंच के लिए समय निकालते हैं क्योंकि जीविका चलाने के लिए उनका नौकरी करना जरूरी हो जाता है | युवाओं का रंगमंच के प्रति अरुचि का एक मुख्य कारण ये भी है कि सरकार नें अपनी तरफ से कभी रंगमंच और रंगकर्मियों के लिए कोई सहायता नहीं की | रंगमंच समाज का दर्पण होता है और समाज में फैली बुराइयों और अच्छाइयों को रंगमंच के कलाकार नाटक द्वारा समाज के सामने लाते हैं | अगर सरकार इस दिशा में कोई ठोस कदम उठाये तो युवाओं की रुचि रंगमंच की तरफ बढ़ सकती है |

नोट- 3 विजेताआें की घोषणा 14 दिसम्‍बर,विजेताओं का फैसला50प्रतिशत लाइक व कमेन्‍ट पर। आगामी विषय- बंद होता पुस्‍तक बाजार, कारण और निवारण । अक्षर सीमा 700 अंतिम तिथि 13 दिसम्‍बर 2017, प्रकाशन तिथि 15-1

 

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