कहानी घर घर की : रचना

कमरे में प्रवेश करते ही राजेश ने देखा कि सीमा अपने मोबाइल पर जुटी हुई है और झल्लाते हुए बोला “जब भी मैं कमरे में आता हूं तुम अपने मोबाइल सें चिपकी रहती हो ,क्या कर रही हो सीमा ?” कुछ नहीं बस कल के बर्थडे की तैयारी कर रही थी कल की पोस्ट तैयार कर रही थी। “बर्थडे ,किसका बर्थडे ?” बड़े आश्चर्य से राजेश ने पूछा ।राजेश की बात सुनकर सीमा गुस्से से लाल हो गई और बोली “तुम्हें तो बस अपना या बच्चों का बर्थडे याद रहता है तुम्हें तो इतना भी नहीं मालूम कि कल मेरा बर्थडे है ” “ओह भूल गये ,कल तक याद था, खैर कोई बात नहीं ,कल तो हमारी छुट्टी है बताओ कल क्या तैयारी करनी है बर्थडे की” राजेश बोला। सीमा बोली “कल मै दिन भर नेट पर रहूँगी क्योकि वाट्सऐप, मैसेन्जर,फेसबुक और फोन ही अब आज के जमाने मे सबसे महत्वपूर्ण है क्योकि इन जगहो पर शायद ही कोई ऐसा मित्र होगा जो मुझे याद न करे वरना सभी आकर मुझे विश करते है और उनका जवाब देना मेरा मुख्य धर्म है “मतलब “राजेश ने पूछा ।मतलब यह कि जमाना बदल गया है बच्चो को घर का खाना पसंद नही ,इसलिऐ जो पसंद होगा रात मे होटल जाकर खा लिया जाऐगा और सुबह के खाने का इन्तजाम तुम और बच्चे अपनी मर्जी से करना ” “कुछ बात समझ नही आई ,मतलब क्या है तुम्हारा सीमा ?,अब तुम्हारे भी ‘पर’ निकल आऐ है।चिल्लाते हुऐ राजेश बोला। “देखो राजेश ,जबतक माँजी थी वह सदैव मेरे बर्थ डे पर टीका करती थी उपहार मे साड़ी या सूट देती थी और मै भी उनके साथ सामंजस्य बना कर चलती थी सभी उत्सवो पर दो सब्जी, रायता,सलाद,खीर,पूड़ी कचौड़ी ही घर मे बनाती थी किन्तु आज की पीढ़ी बिल्कुल भी तालमेल बनाकर नही चलना चाहती ,उसे हर उत्सवो पर पीजा बरगर चाऊमीन मोमोज पेस्टी ही पसंद है ,तुम्हे याद नही ,पिछली बार मैने कितने शौक से यह सब चीजे बनाई थी और बच्चो ने हाथ न लगाया था।पिछली पीढ़ी के साथ भी हमारी पीढ़ी ने समझौता किया है और अब आने वाली नई पीढ़ी के साथ भी हमें ही समझौता करना है इस बदलते परिवेश मे एक शान्ति के लिऐ ।लेकिन हमे अपनी संस्कृति को भी जीवित रखना है और इस कारण कल सुबह मै “मेवे की खीर” घर की देशी मिठाई अवश्य बनाऊँगी और कल बच्चो के साथ हम दोनो मंदिर भी प्रसाद चढ़ाने अवश्य जाऐगे।” सीमा ने कहा।सही कहा सीमा तुमने ,और तीन सौ पैसेठ दिन मे एक दिन तुम्हारा भी होना चाहिये जब तुम अपना पूरा दिन अपनी खुशी मे जियो ,यह सिर्फ तुम्हारी ही जीत नही बल्कि हम दोनो की जीत है।

रचना सक्सेना
इलाहाबाद
मौलिक
6/8/2018

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