राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

भोपाल । ‘साहित्यिक चोरी की रोकथाम एवं संदर्भ प्रबंधन पर मध्यप्रदेश के अग्रणी सेज विश्वविद्यालय एवं मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ द्वारा संयुक्त रूप से विद्वानों के लेखन, संदर्भ प्रबंधन और साहित्यिक चोरी की रोकथाम और शौध में नैतिकता पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया है। एक दिन की यह कार्यशाला शनिवार , 2 जून 2018को आयोजित की गई इस राष्ट्रीय कार्यशाला में 160 से अधिक प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया , जिनमें पुस्तकालय और सूचना विज्ञान से जुडे पेशेवर लोग, शिक्षाविद, सभी विषयों के शोधार्थी और छात्र शामिल रहे।

कार्यशाला का उद्घाटन मध्यप्रदेश निजी विश्वविद्यालय विनियामक आयोग के अध्यक्ष डॉ अखिलेश कुमार पांडेय ने किया एवं अध्यक्षता सेज विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रशांत जैन ने की एवं विशिष्ट अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष डॉ प्रभात पांडेय उपस्थित थे इस अवसर पर डॉ. अखिलेश पांडेय ने कहा कि सूचना और संचार प्रौद्योगिकी ने पुस्तकालयों से जुडी गतिविधियों और पारंपरिक तरीकों को बदल दिया है और लोगों की जरूरतों को पूरा करने की कोशिश में आज पुस्तकालय सेवाएं बहुत दबाव के दौर से गुजर रही हैं। इसलिए यह बेहद जरूरी है कि पुस्तकालयों का प्रभावी और कुशल प्रबंधन करने के लिहाज से नवीनतम सूचना और संचार प्रौद्योगिकी को अपनाया जाए। उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के कारण पुस्तकालयों को लेकर रिसर्च स्कॉलर्स की धारणाएं बदलने लगी हैं और उनकी उम्मीदों में भी बहुत बदलाव आया है। आज पुस्तकालय सिर्फ अध्ययन करने या इच्छित जानकारी तलाशने का स्थान नहीं हैं, बल्कि इन्हें ऐसे सामाजिक केंद्र के रूप में देखा जाने लगा है जहां समूह परियोजनाओं पर भी काम हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी शैक्षिक संस्थान का उद्देश्य शिक्षा और अनुसंधान के साथ-साथ विद्वानों के लेखन की गुणवत्ता को बरकरार रखना भी है। इसके अलावा, डिजीटल दुनिया से सूचना के नए स्रोतों के आगमन के साथ ही शैक्षिक लेखन का सटीक मूल्यांकन करना भी एक बडी चुनौती बन गया है। उन्होंने वर्तमान सूचना युग में छोत्रों के कौशल और ज्ञान को सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण बताते हुए कहा कि अकादमिक लेखन में प्रामाणिकता और ईमानदारी बेहद जरूरी है और इसी तरीके से प्रतिभावान छात्रों और शोधकर्ताओं को पूरी तरह जिम्मेदार बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि दो दिन की इस कार्यशाला से प्रतिभागी निश्चित रूप से प्रामाणिक अकादमिक लेखन के विविध पहलुओं से परिचित होगें ।

मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ के अध्यक्ष डॉ प्रभात पांडेय ने ने अपने विचार व्यक्त करते हुए साहित्यिक चोरी को गंभीर अपराध बताया और कहा कि विद्वतापूर्ण लेखन की दुनिया में इसे दुराचार की श्रेणी में रखा जाता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य संदर्भ की विविध शैलियों को समझने के साथ साहित्यिक चोरी के तमाम पहलुओं पर विचार-विमर्श करना भी है। इसी दौरान साहित्यिक चोरी से बचने के उपायों पर चर्चा भी की जाएगी। साथ ही, कार्यशाला में संदर्भ प्रबंधन से जुडे विभिन्न सॉफ्टवेयर के उपयोग और उनके महत्त्व पर भी चर्चा होगी। इसके अलावा, विज्ञान और तकनीकी पत्रिकाओं के प्रकाशन की समूची प्रक्रिया को समझने का प्रयास भी किया जाएगा। उन्होंने व्यापक महत्त्व की इस कार्यशाला के साथ जुडने पर सेज विश्वविद्यालय को साधुवाद दिया और कहा कि इस तरह के आयोजन से शोध छात्रों को एक नई दिशा मिलेगी एवं मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ लगातार इस तरह की कार्यशाला आयोजित करता रहेगा ।

सेज विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ प्रशांत जैन ने मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ के सहयोग से आयोजित मध्यप्रदेश में अपने तरह की इस पहली कार्यशाला को बहुत महत्त्वपूर्ण बताते हुए उम्मीद जताई कि इस कार्यशाला के माध्यम से साहित्यिक चोरी से संबंधित मुद्दों पर गंभीर चर्चा होगी और साथ ही यह कार्यशाला संदर्भ प्रबंधन की नवीन तकनीक को भी समझने में मददगार साबित होगी। उन्होंने कहा कि इस कार्यशाला का उद्देश्य साहित्यिक चोरी से जुडे अनेक महत्वूपर्ण सवालों के जवाब तलाशना है। उन्होंने कहा कि साहित्यिक चोरी का पता लगाने के साथ उसके परिणामों पर भी चर्चा की जाएगी और इससे बचने के उपायों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद व्यक्त की कि रिसर्च पेपर तैयार करने वाले शोध छात्रों एवं शिक्षकों के लिए यह कार्यशाला उपयोगी साबित होगी विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दिलीप पटनायक ने बताया कि यह कार्यशाला निश्चित रूप से उपयोगी साबित होगी एवं प्रतिभागियों से अनुरोध किया यूजीसी के नियमों के अनुसार ही अपना शोध करें।धन्यवाद ज्ञापन कार्यशाला के संयोजक डॉ विशाल शर्मा ने किया। इसके प्रथम सत्र में इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मैनेजमेंट के लाइब्रेरियन डॉ अप्पा साहेब नाइकेल ने साहित्यक चोरी के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की इसके पश्चात इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ मेनेजमेंट की लाइब्रेरियन डॉ अंजलि ने शोध में नैतिकता पर अपना व्याख्यान दिया। इसके पश्चात सर्वोच्च न्यायालय के सहा पुस्तकालयाधयक्ष संतोष कौरी ने साहित्य चोरी कै कानूनी पहलू पर चर्चा की। द्वितीय सत्र में भारतीय विज्ञान शिक्षा अनुसंधान संस्थान भोपाल के पुस्तकालयाध्यक्ष डॉ संदीप कुमार पाठक ने साहित्यक चोरी की रोकथाम के साफ्टवेयर टर्न टिन के बारे मे विस्तार से बताया एवं किस तरह इसकी रिपोर्ट जनरेट होती है यह जानकारी दी ज्ञात हो कि वर्तमान में यूजीसी ने शोध हेतु साहित्यक चोरी के साफ्टवेयर की रिपोर्ट को आवश्यक कर दिया साथ ही डॉ संदीप कुमार पाठक ने संदर्भ प्रबंधन के साफ्टवेयर जोटेरो का लाइव डेमो दिया एवं इसकी शोध में उपयोगी बताई जर्नल इमपेकट फेक्टर एच इंडेक्स की उपयोगिता भी बताई गई। प्रतिभागियों ने इसे करके भी देखा समापन सत्र में प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरण विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ दिलीप पटनायक द्वारा किया गया।आभार संघ के मनोज मेहर एवं राजेश कठाने ने व्यक्त किया

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