परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”दीपासंजय*दीप”
किसान उन्हें कहा जाता है,जो  खेती का काम करते हैं। इन्हें कृषक और खेतिहर भी कह सकते हैं। ये बाकी सभी लोगो के लिए खाद्य सामग्री का उत्पादन करते है भारत में लगभग 70% लोग किसान हैं। भारत संरचनात्मक दृष्टि से गांवों का देश है, और सभी ग्रामीण समुदायों में अधिक मात्रा में कृषि कार्य किया जाता है इसी लिए भारत को भारत कृषि प्रधान देश की संज्ञा भी मिली हुई है। किसान  देश की रीढ़ की हड्डी के समान है। जो खाद्य फसलों और तिलहन का उत्पादन करते हैं और हमारे राष्ट्र के जीवन के यही रक्त कहे जा सकते हैं ये कच्चे माल एवं वाणिज्यिक फसलों के उत्पादक है। भारत में लगभग 60 % कृषि पर प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से निर्भर भारतीय किसान पूरे दिन और रात काम करते हैं,वह बीज बोते है रात में फसलों पर नजर रखते है, आवारा मवेशियों के खिलाफ फसलों की रखवाली तथा अपने बैलों का ख्याल रखते है। आजकल, कई राज्यों में बैलों की मदद से खेती करने कि संख्या लगभग खत्म हो गई हैं और ट्रैक्टर की मदद् से खेती कि जाती है। वर्तमान समय में किसान  मुसीबत झेल रहे हैं वह कर्ज लेकर इतनी मेहनत से जो फसल पैदा करते हैं उसका सरकार द्वारा लागत से भी कम मूल्य निर्धारित कर दिया जाता है जिसके कारण उन्हें भुखमरी की कगार पर जीवन यापन करना पड़ता है।कई बार इस स्थिति में किसान आत्म हत्या को मजबूर हो जाते हैं आत्म हत्या करने वाले किसानों की संख्या दिन प्रति दिन बढ़ती जा रही है।  प्रतिनिधिकिसानों को 50 हजार तक के नगद लेनदेन की छूट मिलने के बाद भी मंडी में व्यापारी उन्हें नगद भुगतान देने में आनाकानी कर रहे हैं। व्यापारी अपनी मनमानी यहां तक कर रहे हैं कि जो किसान नगद भुगतान मांग रहा है, उसे 50 रुपए प्रति क्विंटल तक कम मूल्य कर भुगतान दिया जा रहा है। मजबूर किसान व्यापारियों की मनमानी झेल रहे हैं। इससे व्यापारियों को मोटा मुनाफा हो रहा है। व्यापारी अपनी मनमानी कर रहे हैं और प्रशासन मौन है। नोटबंदी के बाद कैशलेस को बढ़ावा देने के लिए 20 हजार से अधिक नगद लेनदेन पर रोक लगा दी गई थी। इससे सबसे ज्यादा परेशानी किसानों को हो रही थी।   किसान हमारे देश का आधार हैं, एनडीए सरकार इनोवेशन और कुछ ठोस उपायों के जरिए देश के इस आधार को मजबूत बनाने की कोशिश कर रही है।   केंन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह ने कहा है कि सरकार अन्न एवं कृषि उत्पादों के भण्डारो के साथ किसान की जेब को भरा व् उनकी आय को बढ़ा देखना चाहती है। सरकार इस दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। केंद्रीय कृषि मंत्री ने यह बात नई दिल्ली में ‘कृषि 2022 – डबलिंग फार्मर्स इनकम’ पर आयोजित की जा रही दो दिवसीय कार्यशाला (19-20 फरवरी 2018) के उद्घाटन समारोह में कही।  इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार, कृषि राज्य मंत्री पुरुषोत्तम रुपाला,गजेन्द्र सिंह शेखावत, कृष्णा राज, कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव एस.के पटनायक उपस्थित रहे। इनके अलावा केंद्र एवं राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारीगण, वैज्ञानिक,  अर्थशास्त्री, व्यापार उद्योग के प्रतिनिधि, पेशवरों के संगठन, कॉर्पोरेट एवं निजी क्षेत्र कम्पनियों के प्रतिनिधि, किसान और किसान समितियों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद् और बैंकर्स ने भी इस कार्यशाला में हिस्सा लिया।    कृषि मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के वायदे के मुताबिक 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की वृहद योजना को अमली जामा पहनाने का काम सरकार ने अप्रैल 2016 से ही एक समिति के गठन से शुरू कर दिया था, जिसमें वरिष्ठ अर्थशास्त्री, भारत सरकार के खाद्य प्रसंकरण, फसल, पशु पालन एवं डेरी तथा नीति प्रभागो के संयुक्त सचिव; नीति आयोग के कृषि सलाहकार एवं कई अन्य गैर सरकारी सदस्य को शामिल किया गया। सरकार चाहती है कि कृषि नीति एवं कार्यक्रमों को ‘उत्पादन केंद्रित’ के बजाय ‘आय केंद्रित’ बनाया जाए। इस महत्वाकांक्षी उद्देश्य की प्राप्ति के लिए सरकार द्वारा माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा सुझाए ‘बहु-आयामी सात सूत्रीय’ रणनीति को अपनाने पर बल दिया गया, जिसमें शामिल है-  प्रति बूंद अधिक फसल’’ के सिद्धांत पर पर्याप्त संसाधनों के साथ सिंचाई पर विशेष बल।प्रत्येक खेत की मिटटी गुणवत्ता के अनुसार गुणवान बीज एवं पोषक तत्वों का प्रावधान।कटाई के बाद फसल नुक्सान को रोकने के लिए गोदामों और कोल्डचेन में बड़ा निवेश।खाद्य प्रसंस्करण के माध्यम से मूल्य संवर्धन को प्रोत्साहन ।राष्ट्रीय कृषि बाज़ार का क्रियान्वन एवं सभी 585 केन्द्रों पर कमियों को दूर करते हुए ई – प्लेटफार्म की शुरुआत।जोखिम को कम करने के लिए कम कीमत पर फसल बीमा योजना की शुरुआत।डेयरी-पशुपालन, मुर्गी-पालन, मधुमक्खी –पालन, मेढ़ पर पेड़, बागवानी व मछली पालन जैसी सहायक गतिविधियों को बढ़ावा देना।
    केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि भारत जैसे विशाल और आर्थिक विषमताओं वाले देश में दूर-दराज के दुर्गम इलाकों तक और समाज के सबसे कमजोर वर्ग तक अनाज की भौतिक और आर्थिक पहुँच सुनिश्चित करना एक कठिन चुनौती साबित हो रही थी। परन्तु 2014-15 के दौरान सरकार की अनुकूलनीतियों, कारगर योजनाओं और प्रभावी क्रियान्वयन ने इस कार्य को बखूबी अंजाम दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में ‘क्लाइमेट स्मार्ट एग्रीकल्चर’ विकसित करने की ठोस पहल की गई है। इसके लिये राष्ट्रीय-स्तर की परियोजना लागू की गई है, जिसके अंतर्गत किसानों को जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकें अपनाने के लिये जागरूक एवं सक्षम बनाया जा रहा है।
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www.kisaan.net वेबसाइट उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानो के लिए है । सभी गन्ना किसान इस वेबसाइट पर अपनी गन्ना सप्लाई से सम्भन्धित सारी जानकारी प्राप्त कर सकते है ।   आप अपने गांव का कोड और अपना कोड डालकर अपनी सारी जानकारी इंटरनेट पर देख सकते है और प्रिंट भी निकाल सकते है । यह कोड आपकी गन्ना पासबुक ,गन्ना रसीद और पुराने गन्ना कैलेंडर इत्यादि पर उपलब्ध है ।    ये आंकड़े चीनी मिलों से लिए गए है यदि आपकी चीनी मिल उपरोक्त लिस्ट मे नहीं है तो कृपया अपने सोसाइटी सचिव या जिला गन्ना अधिकारी से संपर्क करे और उनसे अनुरोध करें कि आपकी वाली शुगर मिल का डॉटा किसान डॉट नेट पर उपलब्ध कराया जाए।   किसान डॉट नेट एमिटी सॉफ्टवेयर सिस्टम्स लिमिटेड, नई दिल्ली का एक प्रयत्न है जिससे हमारे देश के गन्ना किसानो को मुफ्त सूचना घर बैठे प्राप्त हो जाये । एमिटी सॉफ्टवेयर गन्ना किसानो और चीनी मिलों के लिए पिछले 25 वर्षो से काम कर रही है और कंप्यूटराइज्ड गन्ना पर्ची की जन्म दाता है । हमे उम्मीद है कि हमारा प्रयास सफल होगा और प्रदेश के गन्ना किसान घर बैठे अपनी सारी जानकारी मुफ्त प्राप्त कर सकेंगे ।
✍🏻नाम-दीपासंजय*दीप*

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