परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी”

कुछ समय से सूखा की स्थिति बनी हुई है और फिर अभी हाल ही में बेमौसम बरसात एवं ओलों की मार से किसान पूरी तरह से टूट गया है उनकी पूरी फसलें बरबाद हो गयीं हंै।  वह भुखमरी की कगार पर आ गया है उनके भूखों मरने की नौबत आ गयी है और सरकार केवल हवाई सर्वे करा रही है। राहत के नाम पर नेताओं द्वारा आश्वासन और केवल वादे दिये जा रहे है। जो कि नेताओं के चुनावी झूठे वादे सिद्ध हो रहे है।  वहीं सर्वे के नाम पर गाँव के पटवारी एवं सरपंच किसानों के साथ उनके खेतों में नुकसान का प्रतिशत उनके रिश्वत में मिलने वाले पैसों पर
निर्धारित कर रहे हैं ऐसे में बैचारे किसान जो कि फसल नष्ट होनें से पूरी तरह बर्बाद हो चुके है और लुट चुके है एवं बचीकुची कसर  भ्रष्ट अफसर उनसें मुआवजा दिलवाने के नाम पर रकम बसूल रहे है। किसान बैचारा हर तरफ से लुट रहा है। बाद में यदि सरकार कुछ राहत का झुनझुना पकड़ा भी देता है तो वह केवल किसान पर पहुँचते-पहुँचते ऊँट के मुँह में जीरा के समान होगा।  मदद जरूरत हो किसानों अभी हाल में है बाद के मदद करने से क्या फायदा होगा यह सरकार को समझ में नहीं आता हैं वह तो कछुवा कि गति से अपना कार्य कर रही है। उस पर भी ये कुभंकर्णी अफसर है जो दस बार जाने पर भी किसी की सुनते नहीं जब तक कि उन्हें कुछ लाभ न मिलें। सरकार को इन तडफ़ते किसानों बिलकुल भी चिंता नहीं वे तो केवल आने वाले चुनाव की तैयारी में लगे है इसी गुणा भाग में लगे है कि कैसे भी हो हम इस
वार भी जीत जायेगे। इसीलिए आज हर नेता चाहे वह किसी भी पार्टी का हो तुरंत किसानों के पास आकर घड़ियाली आँसू बहाता है। झूठे वायदे करता है लेकिन कभी यह नहीं करता कि अपने विधायक निधि एवं सांसद निधि आदि से ही तुरंत ही उनकी कुछ मदद अपने क्षेत्र के इन तड़फते किसानों की कर सके। लेकिन वह नेता ही क्या जो वादा निभा दें। यहीं तो इस देश कि विडंवना है कि भले ही माल्या, मोदी जैसे लोग
अरबों-खरबों का घोटाला करके विदेश भाग जाये और वहाँ पर ऐश करें लेकिन मेहनतकश किसान हाड़-तोड़ मेहनत करने के बाद भी दाने-दाने का तरसता रहे और पलायन करने को विवश हो जाये,कुछ आत्महत्या जैसा घातक कदम उठाने को विवश हो जाते है, लेकिन सरकार के कानों में जंू तक नहीं रेंगती।  किसान तो पहले भी भगवान भरोसे था और आज भी भगवान भरोसे ही खेती किसानी करता है। देश किनती ही तरक्की करले लेकिन सरकार कि दोषपूर्ण नीतियों के कारण किसान हमेशा गरीब रहा है और गरीब ही बना रहेगा।
  राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी’
  संपादक ‘आकांक्षा’ पत्रिका
अध्यक्ष-म.प्र लेखक संघ,टीकमगढ़
  महामंत्री-अ.भा.बुन्देलखण्ड साहित्य एवं संस्कृति परिषद
  शिवनगर कालौनी,टीकमगढ़ (म.प्र.  पिनः472001 मोबाइल-9893520965
  E Mail-   ranalidhori@gmail.com

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