फागुन के फाग -रमा प्रवीर वर्मा

मौसम नें जादू किया, बरसे नेह अनन्त ।
धरती इठलाती फिरे, आया राज बसन्त ।।
..
गीत बसन्ती गा रहे, जोगी हो या सन्त ।
कलियों पर यौवन चढ़ा, बौराया है कन्त ।।
..
भीनी भीनी से महक बिखरी है चहुँ ओर ।
बागों में फिरने लगे , दादुर चातक मोर ।।
..
सरसों फूली खेत में, हँसने लगे पलाश ।
शीत लहर नें ले लिया, देखो अब अवकाश ।।
..
फूलों के सँग झूमकर, भँवरे गाये गान ।
तितली को होने लगा , पंखों पर अभिमान ।।
..
पीत वसन पहने धरा, कर बैठी श्रृंगार ।
अलि गुँजन चहुँ ओर है, प्रमुदित है संसार ।।
..
मौसम की अनुपम छटा, खींचे मन की डोर ।
डाल डाल पर आ गए, देखो फिर से बोर ।।
..
बासन्ती मौसम हुआ, चलने लगी बयार ।
अम्बर से झरने लगी, प्रेम पगी रसधार ।।
..
रमा प्रवीर वर्मा
नागपुर महाराष्ट्र

बैर भाव सब भूल प्रीत के, रंग उड़ायें होली में
हर रिश्तों का मान करें हम, प्रीत बढायें होली में
..
डाल-डाल पर पात-पात पर, फागुन की मस्ती छाई
ढपली पर दे थाप फाग के, गीत सुनायें होली में
..
रहे न कोरे गाल किसी के, डारो ऐसा रंग पिया
बचे न कोई आओ सारी रीत निभायें होली में
..
थिरक रहे सारे नर नारी, होकर मस्त मलंग यहाँ
हम भी ढोलक झांझ मजीरे,खूब बजायें होली में
..
हँसी ठिठोली, देवर भाभी, करते हैं जीजा शाली
पार नहीं लेकिन मर्यादा, हम कर जायें होली में
..
होली का हुड़दंग रसीला, पूरा कब पकवान बिना
लड्डू बर्फी गुझिया चमचम, जमकर खायें होली में
..
नशा फाग का चढा सभी पर,बच्चें हो या बूढ़े हों
भांग भरी ठंडाई देखो , सब गटकायें होली में

रमा प्रवीर वर्मा ……..

Leave a Reply

%d bloggers like this: