परिचर्चा -होली में ससुराल, रीता जयहिन्‍द

होली का त्यौहार और ससुराल – जब घर में नई दुल्हन आती है तो सभी ससुराल वाले अत्यधिक प्रसन्न रहते हैं कि हमारी बहू का पहला त्यौहार है और वे उसे धूमधाम से मनाना चाहते हैं वैसे तो आजकल लोग रंगों से होली खेलना कम ही पसंद करते हैं यदि दुल्हन ससुराल में है और उसके परिवारजनों तथा रिश्तेदारों और पति के मित्रों को होली खेलना पसंद है तो दुल्हन का फर्ज बनता है कि उनकी खुशी में सम्मलित होकर मर्यादा में रहकर होली का पर्व मना सकती है …
इस त्योहार पर उसे सभी की खुशी का ख्याल रखते हुए होली पर ससुराल वालों के रीति रिवाज के अनुसार होलिका दहन देखकर व पूजा करके तथा एक आदर्श बहू की भूमिका का निर्वहन करते हुए खूबसूरती से त्यौहार मनाकर तथा बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए ।जब माँ बाप पुत्र का विवाह करते हैं तो उन्हें होने वाली बहू से बहुत आकांक्षाएँ होती हैं तथा सभी का दिल रखते हुए त्यौहार मनाने की कोशिश करनी चाहिए ..
यदि ससुराल में पति का या सास – ससुर का रिश्तेदारों से या घर के किसी सदस्य से आपसी मतभेद है तो भी नई दुल्हन को होली के बहाने सभी संबंध अच्छे व मजबूत करने का प्रयास करना चाहिए तभी वह एक आदर्श बहू कही जाएगी ।

घर में यदि देवर व जेठ भी होली खेलना चाहते हैं तो शिष्टाचार से उनके साथ होली खेलने से एक प्रेमपूर्वक माहौल बनाकर होली खेलने में कोई बुराई नहीं है ।

यदि पति अपनी ससुराल में अपनी पत्नी के साथ गया है तो उसको भी साली या पत्नी की भाभी व सहेलियों के साथ शिष्टाचारपूर्वक ही होली खेलनी चाहिए तथा जिससे ससुराल में मान – मर्यादा बनी रहे ।

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