होली आई-गोपाल कौशल
 होली आई
जंगल के राजा शेर 
ने एक सभा बुलाई ।
प्रहलाद की भक्ति व
होली की बात बताई ।
खेलेगे जमकर कल
होली हम  सब भाई ।
द्वेषता – नफरत  से
सदा मुसीबत आई ।।
जंगल में रहें मंगल
दुआ करो मेरे भाई ।
लाओं रंग बिरंगे रंग
रंगे प्यारी होली आई ।
मुन्ने का दूध 
मुन्ने के  लिए  मम्मी  दूध  लाई
दूध देख दबे पांव बिल्ली आई ।
मोबाईल में वह हुई इतनी व्यस्त
मुन्ने की बोतल बिल्ली के मुहँ में लगाई ।।
मुन्ने के रोने की जब आवाज आई
तब जाकर मम्मी को समझ  आई ।
कर दिया अस्त-व्यस्त सारा सामान
बिल्ली चटकर गई आज दूध-मलाई ।।
मम्मी ने कहा बिल्ली की तो मौत आई
डंडे से खूब करूंगी मैं इसकी पिटाई ।
पीछे -पीछे खूब दौडी मारने उसको
लेकिन  बिल्ली  मौसी हाथ नही आई ।।

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