परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..श्रीमती हंसा शुक्‍ला
पर्यावरण प्रदूषण के लिये सरकार, निगम, उद्योग, कारखाना या दूसरों को दोषी ठहराने से पहले हमें स्‍वआकलन करना हो कि पर्यावरण के लिए हम स्‍वयं कितने जिम्‍मेदार हैं। निम्‍न कार्यो को अगर हम ईमानदारी से कर रहे हैं तो हम पर्यावरण संरक्षण के लिए महत्‍वपूर्ण कार्य कर रहे हैं और यदि नहीं तो पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले कारको में हम स्‍वंय हैं।
1- आफिस में जाने पर यदि एक ही जगह के रहवासी है, तो गाड़ी शेयर करें।
2- घर के सामने कम सेे कम छायादार और एक फल्‍ादार वृक्ष अवश्‍य लगाया है।
3- क्रासिंग बद होने पर गाड़ी बंद कर लेत हैं, गाड़ी में तेज आवाज में म्‍यूजिक तो नहीं सुनते।
4- कचरा को निर्धारित स्‍थान और निर्धारित गीला-सूखा कचरा पेटभ्‍ में ही डालते हैं।
5- आस पास की जगह में काम होने पर पैदल ही जाते हैं।
6- अपने घर के समारोह में तेज ध्‍वनी में डीजे या म्‍युजिक सिस्‍टम तो नहीं चलाते हैं।
7- सार्वजनिक स्‍थलों में कचरा तो नहीं फेकते हैं।
8- शादी या अन्‍रू समारोह में प्‍लास्टिक डिस्‍पोजल का प्रयोग तो नहीं करते हैं।
9 – बचा हुआ खाना घर के सामने या खुले मैदान में तो नहीं फेकते हैं।
10-गाड़ी चलाते समय जब तब आवश्‍यक न हो हार्न का प्रयोग तो नहीं करते हैं।
11- ट्रेन, बस या सार्वजनिक स्‍थानों में खाद्य सामाग्री के छिलके या रैपर तो नहीं फेकते हैं।
उपरोक्‍त छोटे-छोटे काम यदि आप करते हैं तो आप पर्यावरण संरक्षण में सहयोग कर रहे हैं, यदि आप यह सोचते है कि मेरे अकेले के करने से क्‍या होगा तो आपकी यह सोच पर्यावरण प्रदूषण केा बढा रही है, दूसरे क्‍या कर रहे हैं इस भाव से ऊपर उठकर, हम क्‍या कर रहें है, भाव से हमें पर्यावरण संरक्षण हेतु आवश्‍यक कदम उठाना होगा।
 
हंसा शुक्‍ला
भिलाई।

1 thought on “परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..श्रीमती हंसा शुक्‍ला”

  1. Saroj bala pandey कहते हैं:

    bahut accha likhi behen…best hum sbko apne pariyavarn ki dekhbaal karni chai

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