परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..रीता जयहिंद हाथरसी

ये एक बहुत महत्वपूर्ण सवाल है कि हम कितने जिम्मेदार है पर्यावरण प्रदूषण के लिए ,,,सबसे पहले मेरे विचार से कि हम ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार हैं क्योंकि मनुष्य ही एकमात्र ऐसा प्राणी है ईश्वर की बनाई हुई यौनियों में ,,,,
हमें ये कभी नहीं भूलना चाहिए कि हम इंसान हैं और हम पर्यावरण बचाओ या संसार का अन्य कोई ऐसा कार्य नहीं है कि मानव के लिए दुर्लभ है..
हम यदि चाहें तो अपने आसपास के वातावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए पेड़ लगा सकते हैं और लोगों को भी हतोत्साहित कर सकते हैं जैसे हम घर – परिवार इसके तथा अपने रोजगार के लिए प्रतिदिन समय देते हैं उसी समय में से हम किसी मंदिर चर्च या जनसमूह में कहीं भी होते हैं तो 1 घंटा हम लोगों को प्रेरणा देकर इस कार्य को कर सकते है…
कुछ लोगों का कहना होता है कि ये फालतू लोगों का काम है हमारे पास समय नहीं है तो ऐसे लोगों की सोच को change करना होगा यदि हम ऐसी धारणाओं का विरोध नहीं करेंगे तो हम ही जिम्मेदार हैं ..

दूसरे हम जब हम किसी प्रोग्राम में जाते हैं तो हम वहाँ भी भेंटस्वरूप पौधा दे सकते हैं और उनको उस पौधे की रक्षा कैसे करनी होगी ये बताना भी हमारा ही उद्देश्य होना चाहिए ।इसके बाद हमें सरकार से और जो भी हमारे Area के प्रधान जनसेवक हैं उनसे अपील करनी चाहिए कि हमारे घरों के आसपास जो भी पार्क या मंदिर या ग्राउंड है वहाँ वृक्षारोपण कराएँ तथा हमें उनका सहयोग कर इस कार्य को ऐसे करना चाहिए जैसे कि हम अपने ऑफिस या दुकान और परिवार के लिए करते हैं तथा इस क्षेत्र में जो निपुण हो और वो अपना योगदान देने में समर्थ हों उन्हें लेना चाहिए ।
योगदान तन – धन – मन की सेवा के हिसाब से जो भी देना चाहे उनको संलग्न करना चाहिए ।

जैसे कि पौधों के लिए खाद , पानी व मिट्टी की जरूरत होती है तथा माली की भी जरूरत होती है

इन सभी सामान के लिए हम लोगों को जागरूक करें हमारी जिम्मेदारी है हम नही निभाते तो हम ही प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं..
तथा जो वस्तुएँ पर्यावरण के लिए हानिकारक हैं जैसे आग , धुँआ तथा पटाखे इन चीजों से हमें अपने पेड़ – पौधों को बचाना होगा ।
जहाँ आगजनी या बाढ़ का अत्यधिक खतरा हो और आँधी तथा तेज हवाएँ व जो भी नुकसानदेह चीजें हैं प्रयावरण दूषित जिनसे होता है … रक्षा के लिए समुचित प्रबंध हमें करने होंगे यदि नहीं किए तो आप और सिर्फ हम ही प्रदूषण के जिम्मेदार कहलाएँगे।

ध्वनि प्रदूषण जैसे तेज लाउडस्पीकर का शोर तथा फैक्टरियां जहाँ धुँआ तथा मशीनों का शोर अत्यधिक होता हो तथा कल कारखाने इससे बचाव न करने में भी हम और आप जिम्मेदार हैं तथा ऐसी जगह से भी हमें पर्यावरण की रक्षा करनी चाहिए प्रयावरण दूषित से बचाव करना चाहिए ..
यदि कहीं विशाल फलदायी वृक्ष हो और उस पर मधुमक्खियां तथा ततैया आदि घोंसला बना लेते हैं तथा कीटपतंगे व मच्छर इत्यादि मंडराते हों तो इंसान अपनी मानव बुद्धि का उपयोग न करके उस फलदायी वृक्ष को जड़ से काटकर बड़ा प्रसन्न होता है तथा कहता है कि… मैंने मुक्ति पा ली पर बेवकूफ इंसान को मालूम होना चाहिए लकड़ी ही जो कि वृक्ष की हैं हमें मुक्ति अंत समय में मुक्ति दिलाती हैं यानि आपने पितृ समान वृक्ष देवता को काटकर कैसी मुक्ति पाई ?
हमने उस वृक्ष को काटकर एक हत्या की है बेशक वो पेड़ है जिम्मेदार भी हम … और आप ।
उसकी मधुर संगीत उसकी मीठी शीतल हवा तथा अपने को फलों से वंचित करके हमने उस वृक्ष को खोया जो हमारा पालक है हमें सर्दी- धूप – गर्मी से बचाता है ।
जिम्मेवार कौन सिर्फ हम आप और हम हम हम ।

यदि चाहते तो हम उस वृक्ष को बचा सकते थे कोई बीमारी ऐसी नहीं है जो लाईलाज हो..
ये तो वृक्ष है जिसको हमें ज्यादा कुछ नहीं देना वो हमसे सिर्फ खाद , पानी , मिट्टी ही माँगता है और बदले में कितना कुछ देता है सोचनीय है यदि हम अपने ही रक्षक के भक्षक बन जाएँगे तो सिर्फ हम ही जिम्मेदार है..
मेरा करबद्ध निवेदन है पेड़ लगाओ वृक्षारोपड़ करें व पर्यावरण दूषित होने से बचाएँ इसमे हमारा व आपका ही भला है ।
वरना हम यदि ये कार्य नहीं कर सकते तो सिर्फ और सिर्फ कोई और नहीं हम ही दोषी होंगे और जिम्मेदार होंगे ।
सधन्यवाद जी ।©

*रीता जयहिंद हाथरसी* ( दिल्ली ) 🇮🇳

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