परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..संजय वर्मा “दॄष्टि “

कितने जिम्‍मेदार हैं हम पर्यावरण प्रदूषण के लिए ऋतुओं में आने लगे बदलाव से अनेक चिंतनीय प्रश्न खड़े हुए है | मौसमों में ज्यादा बदलाव यानि अधिक गर्मी और ठंड |क्या ,मौसम के निर्धारित माह अपने माह को आगे बढ़ा रहे है ? पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि  पर्यावरण मे बदलाव का बुरा असर  लकड़ी पर भी हो रहा  है |उसकी प्रकृति बदल रही है और उससे बनने वाले वाधयंत्रों मे वो मधुर स्वर नहीं  पायेगे , जो की पहले पाते थे । ये एक चिंता का विषय है | वैज्ञानिक दॄष्टि  कोण से भी संगीत थेरेपी द्धारा संगीत सुनाकर पेड़-पोधों,पशु-पक्षियों को पूर्ण स्वस्थ्य एवं  विकसित करने के प्रयोग जारी है | जिसके सफल परिणाम भी सामने आये है |पर्यावरण मे बदलाव को सुधारने हेतु कारगर कदम उठाना होगा ,इस हेतु वृक्षारोपण  ज्यादा करे व हरे -भरे वृक्षों को कटने ना दे, |ताकि वाधयंत्रों मे वो मधुर स्वर पा  सके और ऋतु चक्र सही हो  सके|पृथ्वी को बचाने के लिए कुछ तो हमें कराना होगा|  पूर्व मे जलवायु पर हुए  डरबन  अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन मे जलवायु परिवर्तन के संबध मे किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुँच  पाने से जनाक्रोश भी  उभर कर सामने आया था | हमें इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि   खाद्दान्न , बायो फ्यूल हो या कागज हो | हर चीज लकड़ी और उससे पैदा करने वाले जंगलो पर आकर ठहर जाती है | इन वस्तुओं से आगे उपजने वाली जरूरतों को पूरा करने के लिए भविष्य मे कई हेक्टर जमीन की अतिरिक्त आवश्यकता होगी जो की निश्चित तोर पर ही जंगलों को काट कर प्राप्त की जाएगी | एक जानकारी के मुताबिक आर आर इ  के अनुसार सन २०३० अंत गाज उष्ण देशीय (ट्रापिकल ) जंगलों पर गिरेगी जो की पर्यावरण के हिसाब से गंभीर एवं चिंतनीय पहलू  है| अधिक जंगल काटने से ज्यादा कार्बन उत्सर्जन .अधिक मौसम परिवर्तन और सबके लिये कम संपन्नता ही प्राप्त होगी | ये सर्वविधित है की वृक्षों से ताप का नियंत्रण होता ही है साथ ही वायु मंडल की विषाक्तता भी कम हो जाती है | जितने अधिक वृक्ष होगें उतना वातावरण शुद्ध एवं स्वच्छ होगा |वृक्षों की कमी होने से वन्य प्राणियों की जीवन पर भी प्रश्नचिंह लगेगा सो अलग | भविष्य मे हरित क्रांति को विलुप्त होने से बचाने हेतु वृक्षारोपण की अनिवार्यता  व वृक्षों को काटने से बचाना ही सही तरीका होगा |ताकि ऋतु चक्र एवं तापमान में असमय परिवर्तन न हो पाए |

संजय वर्मा “दॄष्टि “

मनावर ,(धार )

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