परिचर्चा: कितने जिम्मेदार हैं हम…..अशोक सपड़ा
गर कोई मुझसे ये पूछे कि प्रदूषण के लिए क्या हम ही जिम्मेदार है और कितने तो मेरा जवाब यही होगा हाँ हम ही इसके लिये सबसे बड़े जिम्मेदार भी है और अब इसको कम करने की जिम्मेदारी से हम भाग भी नहीं सकते ।पहले तो हमनें इसको रोकने के लिये कोई भी प्लान तक तैयार नहीं किया और हर बात के लिये सरकार को कोसते रहतें है लेकिन कभी हमने यह नही सोचा की हमने क्या खोया क्या पाया इस विषय पर, कभी कोई गम्भीर चिंतन तक नहीं किया और बस सिर्फ एक दूसरे को कोसते है इस बात के लिये लेकिन अपने गिरेबाँ में हम झांक कर तक नहीं देखतें आख़िर क्यों ?
क्यों नहीं हम सबसे पहले अपना गिरेबाँ झाँक कर देखे की हम कितने जिम्मेदार है इसके और अपनी आने वाली भविष्य की संतानों के लिये हम ने क्या खो दिया अब तक जिसकों वापिस पाया तो नहीं जा सकता लेकिन सुधारा अवश्य जा सकता है ये मनन करने की आवश्यकता आज इसलिए भी हो गई है कि जो हमने बोया है वही काट रहें है अब ,*जब बोया पेड़ बबूल तो आम कहाँ से पाएंगे मियाँ*
हाँ मैं तो पूरा जिम्मेदार हूँ इस बात का ,क्या आप समझतें है कि आप भी उतने ही जिम्मेदार है प्रदूषण फैलाने के ,नहीं आप बिल्कुल नहीं मानेंगे क्योंकि आप सबसे ज्यादा सफ़ाई पंसद इंसान है आप क्यों करेंगे ऐसा?
तो दोस्तों मैं यह बताता हूँ कि हम प्रदूषण फैलाने में सब जिम्मेदार है कैसे तो समझिए पहले हम इसको कैसे फैलाते है और उसके बाद इसके उपाय क्या क्या हो सकते है, हम सब ने आज़कल गर्मी से बचने के लिये विंडो या सिप्लीट ac लगवा रखा है ये सबसे ज्यादा ठंडी हवा फ़ेकतें वक्त बाहर गर्म हवा फेंकते है जी की हमारे इनवायरमेंट को बहुत गर्म कर रहा है
बिजली की खपत भी इससे जयादा है, Cng से चलने वाली बस के पीछे तो एक रेड लाईट पर आप 5 मिंट भी खड़ें नहीं हो सकते
दूसरा हम अपना कूड़ा करकट घर से बाहर फेंक देते है इन सबकी सफ़ाई के चक्कर में भी धूल उड़ाई जाती है
झाड़ू मारते वक्त हम पानी का छिड़काव नहीं करते जिससे कि धूल हवा में रह जाती है
बिना वजह हम कुछ ना कुछ जलाते रहते है जैसे कि धूम्रपान सबसे बड़ा प्रदूषण है अगर बीड़ी आदि में रोक लग जाये तो भी प्रदुषण कम हो सकता है
दिवाली पर या शादी आदि पर जलने वाली आतिशबाजी भी प्रदूषण का बड़ा कारण है
कागज़ की वेस्टिंग् आदि करके ,क्योकि कागज़ पेड़ की लकड़ी से बनता है जिस्की वजह से पेड़ काटने पड़ते है
हमारे जोर जोर से शादी या धर्मिक कार्यों में जोर से लाउड स्पीकर का उपयोग  ध्वनि प्रदूषण का एक बड़ा कारण भी है
हम सबको मिलकर इस को रोकना होगा उसके लिये नए नए प्रयोग करने होंगे
AC की जगह कोई नेचुरल उपाय करना होगा जिससे कि ठंडक मिल सके
कागज़ आदि की वेस्टिंग् रोक कर
कूड़ा करकट जलामे से रोककर
हम सब इसके जिम्मेदार है तो हमको प्रदूषण कम करने की भी जिम्मेदारी दिल से स्वीकार करनी चाहिए जिससे कि हम अपनी आने पीढ़ियो को सुरक्षित कर सकें
अशोक सपड़ा की क़लम से दिल्ली से

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