कविता-शहीदों में कही, ”दीपा संजय “दीप”
शहीदों में कहीं मेरा,अभी नाम बाकी है।
कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम बाकी है।
 
अमन की राह चल के जो, बुलन्दी हमने पाई है।
अलग छवि विश्व में अपनी,हमने बनाई है।
वतन के इन शहीदों को ,मिले सम्मान बाकी है।
 
शहीदों में कहीं मेरा ,अभी नाम बाकी है।
कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम बाकीहै।
 
कर्ज है उनका भारत पर,जो खेले खून की होली।
झूले थे फाँसी पे हँसकर,खाई थीं सीने पे गोली।
वतन पे मरने वालों को मेरा सलाम
बाकी है।
 
शहीदों में कहीं मेरा ,अभी नाम बाकी है।
कि अपने देश को मेरा ,अभी पैगाम
बाकी है।
 
जय हिंद
✍🏻नाम-दीपा संजय”*दीप*”
 

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