फिर वही कोशिश- मुस्‍कान

फिर से कोशिश कर रही हूँ
अरमानो के फूल खिलाने का
फिजा में बहार लाने का
जो उजड़ गया है मेरा चमन
उसे बसाने का
फिर से कोशिश कर रही हूँ
दिल में जज्बात लाने का
मन में एहसास जगाने का
अपनी इस खामोश धड़कनो में
कुछ नयी जान डालने का
फिर से कोशिश कर रही हूँ
दुनिया से नफरत हटाने का
प्यार का संगीत दोहराने का
मानवता का धर्म निभाने का
अपनी काबलियत के बल पर
एक नयी दुनिया बसाने का
फिर से कोशिश कर रही हूँ
कुछ कर दिखाने का
अपनो के सपनो को
साकार करने का
जो अधुरी है मेरी जिंदगी
उसे पूरा करने का
फिर से कोशिश कर रही हूँ
दुश्मनो से दोस्ती करने का
अजनबी से रिश्ता जोड़ने का
किसी की हसरतो को
अपना अरमान बनाने का
फिर से वही कर रही हूँ कोशिश
जो पहले कर चुकी हूँ
इंसानियत का फर्ज निभाने का ।

मुस्कान चाँदनी, बिहारशरीफ

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