परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? ज्‍योति मिश्रा

हालाँकि आज के युग में सहजता से किसी पर विश्वास नहीं किया जा सकता, क्योंकि आज आये दिन यही खबर दिखती है, कि किसी भूखे ने खाना माँगा, फिर उसमे कुछ मील होने का नाटक कर खाना देने वाले से पैसे ऐंठे। किन्तु मैं सहज ही किसी पर अविश्वास नहीं कर पाती और मदद के लिए तत्पर हो जाती हूँ।
अतः किसी भूखी महिला को देख मैं उसे सर्वप्रथम भोजन कराऊँगी, फिर उससे उसका नाम और ठिकाना पूछूँगी, लगा कि वो सचमुच बेसहारा है तो मैं उसे अपने घर ले आऊँगी, उससे उसके, उसके परिवार के और उसकी पढ़ाई लिखाई के बारे में पूछूँगी, उसमें कौन सा हुनर है ये देखूँगी, और उसे उसके हिसाब से उस संस्था में भेजूँगी जो बेसहारा स्त्रियों को सिलाई, बुनाई, कढ़ाई तथा अन्य हस्तकलाओं में प्रवीण कर अपने पैरों पर खड़ा करने में सहायता प्रदान कर सकती हैं अगर कोई खर्च हुआ तो उसे मैं वहन करूँगी उससे ये वचन लेकर कि कुछ बनने के बाद वो उस खर्च को किसी और अपने जैसी स्त्री पर करेगी। वे बाढ़, अकाल, भूकम्प या अन्य प्राकृतिक आपदाओं से पीड़ित इलाकों में समाज सेवा कर सकती हैं ।
इस सबके पहले उसे सिखाऊँगी अपने अधिकारों के लिए लड़ना, किसी से बेवजह न डरना, गलत बात न करना न मानना, अत्याचार न सहना न करना।
संसार है तो बहुत बड़ा , किंतु कभी कभी बहुत छोटा सा लगता है, जब मैं जहाँ-तहाँ ऐसी महिलाएँ देखती हूँ।

11 thoughts on “परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? ज्‍योति मिश्रा”

  1. Dines Prajapati कहते हैं:

    Beautiful emotional imagination. Nice to think but seems lot of obstructions may default it.

  2. नीरजा मेहता कहते हैं:

    बहुत सुंदर विचार ज्योति जी, यदि सभी ऐसा सोचने लगे तो कोई असहाय नहीं रह जायेगा। जरूरत है सोच बदलने की और विश्वास रखने की। शायद आपकी जगह मैं होती तो ऐसा ही कुछ करती।
    नीरजा मेहता

  3. sampada mishra कहते हैं:

    बहुत ही उत्तम विचार मैम,किसी जरूरतमंद इंसान को भी उत्पादक बनाने का आपका दृष्टिकोण सराहनीय है।

  4. सरिता नारायण कहते हैं:

    ज़ख़्म भरने से ही भरते है ,, और जो दर्द और ज़ख़्म को भरता है वही असली मसीहा होता है ,,,
    बहुत सुन्दर और नेक ,,
    बधाईयाँ ज्योति ,,,,?

  5. यदुवंश त्रिवेदी कहते हैं:

    बहुत ही सुंदर और सराहनीय

  6. सुमनत्रिवेदी कहते हैं:

    ज्योति के विचार बहुत ही सराहनीय हैं बहुत खूबसूरतह हैं

  7. Anubhooti कहते हैं:

    Beautifully expressed and well written!

  8. Pratik कहते हैं:

    बहुत ही सुंदर

  9. अशोक कुमार शर्मा कहते हैं:

    त्वरित मदद के बजाय यदि व्यक्ति को जीवकोपार्जन हेतु समर्थ कर दिया जाए तो अधिक अच्छा है, एतदर्थ आपके विचार श्लाघनीय हैं।

  10. किरण सिंह कहते हैं:

    अच्छे विचार हैं आपके.. साधुवाद आपको

Leave a Reply

%d bloggers like this: