परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’

समाज सामाजिक संबंधों का जाल है किसी ने सत्य कहा है।इन्हीं जालों के बीच नाना प्रकार के लोग रहते हैं। गरीबी से लेकर अमीरी तक इसी समाज के अन्दर अपना जीवन यापन करते रहते हैं कोई रोटी से आजाद है तो कोई रोटी बिन मोहताज है।जबकि मनुष्य को न्यूनतम आवश्यकता की वस्तुए रोटी कपड़ा और मकान जीवन जीने के आवश्यक है। इसके बिना भी कुछ लोग होते हैं जो मजबूरी में जीवन बिताने के लिए बाध्य होते हैं। और कर दिया जाता है वर्गीकरण रख दिया जाता है नाम बेसहारा, गरीब,कमजोर, परिस्थिति का दास आदि।
यही पर सवाल उठता है “क्या कर सकते हैं आप ? भूख से तड़पति एक बेसहारा महिला के लिए” कहा जाता है कि बेसहारा का मदद करना सबसे बड़ा पुण्य का काम होता है। यहाँ पर बात हो रही है एक पुण्य काम करने कि अब हम सीधे उन बिन्दुओं पर चलते हैं जो एक भूख से तड़पति बेसहारा महिला के प्रति हमें क्या करना चाहिए।
सर्वप्रथम हमारा कर्तव्य मानवता के नाते से उस भूखे महिला को भोजन पानी देकर उसके तड़पने की स्थिति को सामान्य स्थिति में लायेंगे ताकि उसके आत्मा को परम शांति मिल सके क्योंकि उस वक्त उसकी भूख मिटना ही परमात्मा है। उसके बाद उस महिला की यह हालत कैसे हूई है इसके कारणों का पता लगायेंगे क्योंकि बिना कारण का निवारण नहीं हो पाता है। इन्हीं कारणों के निवारण हेतु पुरी लगन से निदानात्मक उपाय को ढूढने में लग जायेंगे। ओर सफलतापूर्वक पूर्ण करने की सोच लिए हम अपने कार्य के प्रति हमेशा सचेत रहेंगे। और उस वक्तअपने स्तर के अनुसार उसकी पुरी मदद करने की कोशिश करेंगे चाहे सरकारी या गैरसरकारी सामाजिक कल्याण संस्थानों/योजनाओं से सुविधा मुहैया कराने की सिफारिश क्यों न करना पड़े ताकि उसी महिला की नहीं बल्कि वैसे समाज की सभी समस्याओं का हल निकल सकें।
इसकी व्यवस्था करने में पुरी ईमानदारी से लगेंगे क्योकि हम एक लोकतांत्रिक गणराज्य में है और इसका सीधा सा सवाल होता है सभी लोग स्वतंत्ररुप से स्वछन्द रुप से इस दुनिया में सभी मानव जाति समानता का भाव लिए एक दूसरे के साथ हाथ मे हाथ मिलाकर कदम बढ़ाते चले। इसी का हवाला देते हुए बेसहारा महिलाओं के जनकल्याण हेतु सरकार का ध्यान आकृष्ट करायेंगे।
भविष्य में कोई भी महिला इन समस्याओं से ग्रसित न हो जिसमें क्षेत्रानुकूल योजनाएं भी कारगर साबित होगी। जैसे ग्रामीण स्तर पर कुछ लोगों का एक समिति बनाकर बेसहारा महिलाओं के उत्थान के लिए कार्य किया जा सकता है। इसी प्रकार बहुत से गांवों में जाकर बेसहारा महिलाओं के लिए दान के रुप में आनाज से लेकर पैसा इकट्ठा करके इनकी समस्याओं को दूर कर सकते हैं। इतना ही नहीं बल्कि इन्हें कुटीर उद्योग की ओर अग्रसर कर उनके भविष्य को भी सुरक्षित रखने की कोशिश करेंगे।
इस प्रकार से हम एक बेसहारा गरीब महिला के लिए तमाम तरीके अपना कर उसे सामान्य श्रेणी में लाकर भविष्य में किसी भी महिला की ऐसी स्थिति न आये क्योंकि किसी को भूख से तड़पना हमारे लोकतांत्रिक देश के लिए प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है।
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रचनाकाल -: 15/01/2018
रचनाकार -:
© रमेश कुमार सिंह ‘रुद्र’ (माध्यमिक शिक्षक सह युवा साहित्यकार)

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