परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? सुमन त्रिवेदी

परोपकार ही सर्वोपरि है। किसी लाचार बेसहारा की मदद करने हमेशा तत्पर होना चाहिए इसे यदि अपने जीवन का ध्येय बना कर चला जाए तो एक मानसिक सुख की अनुभूति होती है।किसी को लाचार भूखा ना देख सकना मेरी एक बहुत बड़ी कमजोरी है।अपनी इसी कमजोरी की वजह से मैं उनकी मदद करने हमेशा तत्पर रहती हूँ।
किसी भूख से तड़फती बेसहारा महिला को देख कर करुणा का भाव जागृत होना स्वाभाविक है।और इसी करुणा और अपनी आदत से वशीभूत होकर मैं उस महिला के निकट जाऊँगी उसकी भूख लाचारी कीवजह जनना चाहुँगी तथा उसकी मदद करने को मन में विचार बनाऊँगी कि उसकी मदद करनी चाहिए या नहीं।
आजकल जमाना बड़ा ही खराब है।पता चला कि हम जिसकी मदद कर रहे हैं।उसने हमारी मजबूरी और दया का फायदा उठा हमें किसी बड़ी मुसीबत के हवाले कर दिया।पूर्ण रूप से छानबीन कर पूर्ण विश्वास प्राप्त करके मैं पहले उसे भर पेट भोजन कराऊँगी उसके तृप्त होने पर अपने स्वभाव अनुसार मुझे आत्मिक सुख की प्रप्ति होगी।और मेरे अपनत्व से उसे धीरज बंधेगा,वह निडर होकर अपनी विवशता मुझे बता सकेगी।
उसके रहने का इंतजाम करुँगी,फिर उसको क्या आता किन गुणों से वह परांगत है उससे जानकारी लूँगी।उसको ऐसी संस्था में भेजने का इंतजाम करुँगी जहाँ उसकी कला को निखार कर उसको आगे बढ़ाने को प्रेरित किया जाए ताकि वह अपना जीवनयापन आसानी से कर सके,इस दौरान यदि मुद्रा की जरूरत पड़ी तो मै पैसों से उसकी मदद करने से पीछे नहीं हटुँगी।ताकि भविष्य में वह भी किसी की मदद कर सके।
अपने अधिकार के लिए लडना तथा नारी महत्व उसे बतलाऊँगी कि नारी किसी से कम नहीं है।वह हर परिस्थिति में लड़ सकती औरआवाज उठा सकती है।अपने जैसी बेसहारा भूखों की मदद कर सकती है।यही लक्ष्य ध्येय बनाकर चलना ही हर किसी के जीवन का मूल मंत्र होना चाहिये।
********* सुमन त्रिवेदी
जबलपुर(म.प्र)

4 thoughts on “परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? सुमन त्रिवेदी”

  1. डॉ. ज्योति मिश्रा कहते हैं:

    एक भूखी और बेसहारा स्त्री के लिए सुमन दीदी की भावनाएँ सचमुच सराहनीय हैं

  2. यदुवंश त्रिवेदी कहते हैं:

    बहुत ही सुंदर और सराहनीय

    1. Pratik कहते हैं:

      बहुत ही सुंदर

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