परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप? कवि राजेश पुरोहित
आज हमारे देश में कई महिलाएं भूख से दम तोड़ रही है। उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है। किसी के तो घर तक नहीं है। किसी महिला के पति नहीं माँ बाप नहीं। भिक्षा कर जीवन यापन कर रही है। कई महिलाएं मानसिक विक्षिप्त है। भीख मांगकर पेट भर लेती है या भूखी ही भटकती रहती है। कई रोग ऐसे भूखे रहने के कारण होते हैं।जिस दिन भूख सहन नहीं होती दम तोड़ देती है। हम मानवता के नाते बेसहारा महिला जो भूखी है उसका पेट भरे इस हेतु उसे अनाथालय में ले जाना चाहिए।कई सेवा समितियाँ है जहाँ महिलाओं को रखा जाता है। उन्हें रोजगार से जोड़ने हेतु हुनर भी सिखाया जाता है जैसे सिलाई का काम, बुनाई का काम आदि।
   जो धनाढ्य लोग है उन्हें चाहिए ऐसी महिलाओं को सरकारी लाभ दिलाये। निराश्रित महिलाओं को पेंशन का लाभ मिल सकता है। इस हेतु पढ़े लिखे लोगों को आगे आकर सहायता करना चाहिए।  अन्न का इंतजाम करने के लिए ऐसी महिलाओं को प्रत्येक घर से एक रोटी देना शुरू करें तो उसका आराम से पेट भर सकता है। ऐसी महिलाओं की सभी मुहल्ले के लोगों को आर्थिक सहायता भी करना चाहिए। महीने में थोड़ा दान निकालकर बेसहारा महिलाओं की भूखी महिलाओं की मदद के लिए सभी को आगे आना चाहिए।बेसहारा महिलाओं के आवास, भोजन, आदि की व्यवस्था होना चाहिए। एक ओर हम नारी के सम्मान की बात करते हैं वहीं दूसरी ओर देखे तो आज भी बहुत संख्या में महिलाएं रेलगाड़ियों में बस स्टैंड पर गली मोहल्लों में भीख मांगकर पेट भर रही है।
कोई भूखा न सोये मेरे देश में
आओ भरपेट भोजन की बात करें

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