परिचर्चा: क्या कर सकते हैं आप?डॉ राजकुमारी वर्मा
एक बेसहारा महिला यदि भूख से तड़प रही है, तो मेरे विचार से सर्वप्रथम उस के लिए भोजन दिया जाना आवश्यक है। प्रश्न यह उठता है कि महिला बेसहारा तो है किंतु भिखारी नहीं है, तो वह रोटी कैसे स्वीकार कर सकती है। स्वाभिमानी व्यक्ति भूखा मर जाना पसंद करेगा किन्तु भिक्षा नहीं ग्रहण करेगा।
इसी चर्चा में एक दूसरा प्रश्न उठता है कि महिला की उम्र क्या है? यदि युवा है और थोड़ा बहुत पढ़ी लिखी है तो उसे रोजगार दिलाने में मदद की जा सकती है। यदि अनपढ़ है तो घर के काम के लिए उसे रखा जा सकता है अथवा किसी ऐसी संस्था में उसे पहुँचाने में सहायता की जा सकती है जहाँ महिलाएं पापड़, बड़ी,अचार, मुरब्बे, हथकरघे द्वारा दरी आदि बनाने का करती हों। इस प्रकार वह स्वावलम्बी होकर स्वयं अपने भोजन की व्यवस्था करने के योग्य हो सकती है। इसी संदर्भ में उसकी तात्कालिक आवश्यकता अर्थात्  भूख को शांत करने का एक ही उपाय है कि उसे अपने घर बुलाकर प्रेम पूर्वक भोजन कराया जा सकता है। इस पाकर भोजन देकर  हम उसकी तात्कालिक आवश्यकता की पूर्ति कर सकते हैं और उपर्युक्त किसी कार्य मे लगाकर हम उसे सदैव के लिए स्वावलम्बी बना सकते हैं।
इसी चर्चा में दूसरा प्रश्न यह भी उठता है कि यदि महिला वृद्ध है और कार्य करने में अशक्त है तो हम अपने मोहल्ले के लोगों से बात कर उसके लिए उनसे  आंशिक आर्थिक सहायता प्राप्त कर स्थायी रूप से उसके भोजन की व्यवस्था कर सकते हैं अथवा किसी वृद्धाश्रम में उसके रहने और खाने की व्यवस्था कर सकते हैं।
ऐसी महिलाओं को भी जो अकेली और बेसहारा हैं, समाज में इज्जत पूर्वक जीने का पूरा अधिकार है। यह समाज के लोगों की जिम्मेदारी बन जाती है कि वे उन्हें स्वावलम्बी बनाने में उनकी पूरी तरह से सहायता करें। निराश्रितों की सहायता करना भी एक प्रकार की पूजा है साथ ही एक सहृदय नागरिक का कर्तव्य भी है।
डॉ राजकुमारी वर्मा

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