परिचर्चा:आखिर क्यों सताई जाती हैं-रीता जयहिंद हाथरसी

अक्सर गरीब घर की लड़की को ससुराल में प्रताड़ना मिलती है *कारण* ….उसे कम दहेज के लिए रोजाना जलील किया जाता है घर – परिवार का सारा काम उस को ही करना पड़ता है….यहाँ तक कि छोटी ननद ष देवर भी तहज़ीब से बात नहीं करते और बात – बात पर उसके माँ – बाप और भाईयों को गाली देते रहते हैं …. पर यदि पति जीवित है तो वो स्थति सँभाल लेता है और कहीं बेटे को न खो बैठे बेटा बहू को लेकर अन्यत्र न चला जाए तो स्वार्थवश उनका वश नही चलता….
जब तक लड़की का पति जिन्दा है औल कमाऊ है तो ससुराल में बहू से कोई गलत ल्यवहार नहीं करता लेकिन अकस्मात बीमारी की वजह से या अचानक एक्सीडेंट की वजह से पति की मृत्यु हो जाती है और बच्चे छोटे हैं तो उस लड़की से ससुराल में कोई ठीक बर्ताव नहीं करते।
जेठ – जेठानी या सास – ससुर सभी उस पर जुल्म ढाने लगते हैं और घर में नोकरानी समझकर दो रोटी के लिए परेशान करते हैं और उसे कहेंगे कि मायके जाकर रहे ऐसे में लड़की की हालत देखकर माँ – बाप असमय ही बूढ़े और बीमार हो जाते हैं तथा लड़की की फिक्र में असमय ही मृत्यु हो जाती है ।
माँ – बाप के न रहने से लड़की के मायके में भाई – भाभी भी नहीं पूछते।
इसका *निवारण* ये है कि बेटी को उच्च शिक्षा प्रदान करना और अपने बराबर के घर में लड़की का विवाह करनाा लड़की की शादी या तो ऐसी जगह करनी चाहिए जिन्हें आप जानते हैं तथा अंजान जगह लड़की की शादी करने से पहले लड़की के पति व ससुराल वालों की अच्छी तलह से इन्कवायरी करके तसल्ली से ही शादी करनी चाहिए।
जिस संतान को आपने पैदा किया है उसे दुखी देखकर आपका मन रोएगा…इसलिए लड़की को उचित शिक्षा देकर या लड़की पढ़ाई में ज्यादा होशियार नहीं है तो उसकी रुचि के मुताबिक लड़की को ब्यूटीशियन का कोर्स या बुटीक कोर्स या कुकिंग कोर्स और भी बहुत से ऐसे कोर्स जैसे सिलाई – कढ़ाई व बुनाई अनेकों कोर्स हैं जिससे लड़की आत्मनिर्भर होकर स्वजीवन – यापन कर सकती है जिससे आपकी लड़की हर परिस्थिति का सामना कर सकती है और आपको कभी भी अपनी बेटी की वजह से चिंताग्रस्त नही होना पड़ेगा ।
*चिता चिता समान है* जिस बेटी को आपने जन्म दिया है आपका फर्ज है उसे खूब पढ़ाओ लिखाओ ।
*बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ* आज के समय में बेटियां बेटों से ज्यादा माँ – बाप के सुख – दुख का ख्याल रखती हैं ।
अंत में ये *सलाह* देकर अपनी लेखनी को विराम देना चाहूँगी कि ……बेटी को आत्मनिर्भर बनाएँ जो कभी भी आपकी गरीबी की वजह से या दहेज न दे पाने की वजह से सताई जाए और पति के मृत्यु के पश्चात ससुराल वालों पर या माता – पिता पर बोझ बने ।
धन्यवाद ।।
*रीता जयहिंद हाथरसी* ( दिल्ली )

4 thoughts on “परिचर्चा:आखिर क्यों सताई जाती हैं-रीता जयहिंद हाथरसी”

  1. रीता जयहिंद अरोड़ा कहते हैं:

    नाइस आलेख बधाई

  2. Akash Rathod कहते हैं:

    अती सुंदर और ह्रिदय स्पर्शी संदेश

  3. रीता जयहिंद अरोड़ा कहते हैं:

    congratulations

  4. मनोज शिवदासानी कहते हैं:

    स्थान स्थान पर व्हात्सप्प वाले * चिन्ह देने पर लेखन की गंभीरता कम दिखाई देती है.

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