परिचर्चा:आखिर क्यों सताई जाती हैं-हेमलता गोलछा

आखिर क्यों सताई जाती है गरीब घर की लडकियां ससुराल में? जब हो जाती है विधवा। गरीबी  का होना ही अभिशाप है, गरीबी  न केवल  रोटी जैसी जरुरतों की मोहताज  बल्कि हर उस  व्यथा का शिकार होती है, जिसका सीधा असर  जीवन  पर पडता है।  कभी कभी  मेरे विचार में आता है कि   दौलत का तराजू इतना  वजनदार कैसे हो सकता है कि कारण जिसके  लाखो लडकियां ससुराल में मर जाती है या मार दी जाती है। हाल ही में मेरे घर के नजदीक  ही मेरी सहेली  सुमी का घर   था  अब है नही। इसका भी कारण है  उसके पति ने  खुदकुशी  कर ली ।  खुदकुशी की वजह भी शायद पारिवारिक अनबन रही होगी, किसी को  नहीं  खबर की वजह क्या रही होगी? सुमी मायके गई हुई थी और उसके पति ने इहलीला समाप्त कर डाली। पुलिस की जांच पड़ताल मे सास-ससुर ने कहा कि  सुमी के कारण ही मेरे बेटे ने आत्महत्या की है, वो अव्यवहारिक है उसने मेरे बेटे को उकसाया है और मरने पर मजबूर किया है । पुलिस ने पडताल में बहुत बारीकी दिखाते हुए  पाया कि  सुमी का कोई गुनाह नही था  बल्कि  दोषी वो स्वयं ही था। उसका अवैध संबंध किसी अन्य लडकी से था इसी कारणवश उलझने  ज्यादा बढ़ गई और उसे खुदकुशी करनी पडी। सुमी जब ससुराल आ गई और एक विधवा का जीवन जीने लगी, सास की प्रक्रिया में  एक नवीन शब्द का जन्म हो गया। उसके  ससुराल वालों ने डायन कहना शुरू कर दिया। घर सभी काम – काज करने के बाद भी उसे भरपेट भोजन भी नही मिलता। मायके कई दरिद्रता का उसे भान था। शायद इसी कारण हजारों बेटियां इस अग्नि में झुलस कर मर जाती है। उनकी आवाज दीवारों से टकरा रह जाती है। हमारे देश का सबसे बड़ा  दुर्भाग्य है  यहां  बहु बेटियाँ सुरक्षित अपने ही घर में नही होती, उन्हें ससुराल मे पराये घर से आई कह कर संबोधित किया जाता है और मायके में पराया धन। दोनों ही घर पराया कह कर   उसे यह आभास दिलाते हैं कि उसका हक कितना तुच्छ है। गरीब घर की बेटियों को देहेज न दे पाने कारण जिंदा जला दी जाती है।  मां बाप कर्ज लेकर विवाह करवाते  है और ससुराल वालों की हर संभव मांग पूरी करते है। फिर भी बेटियां गरीब घर की दफन होती है।

हेमलता गोलछा गुवाहाटी

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