परिचर्चा:आखिर क्यों सताई जाती हैं-कवि राजेश पुरोहित
हमारे देश में आदिकाल से ही गरीब लोगों का शोषण होता आया है। अर्वाचीन काल में लड़कियों के साथ व्यभिचार की खबरें प्रतिदिन समाचार पत्र में छपती ही रहती है। लड़कियाँ गरीब घर की हो तो उन्हें पहले राजा अपने यहाँ दासी बना लेते थे। गरीब घर की ये लड़कियां ही राजा रानी की सेवा किया करते थे। राजा लोग सुरा सुंदरी में मग्न रहते इन दासियों के साथ संबंध बनाते इनका शोषण करते थे। आज भी गली मोहल्ले में गरीब के घर से लड़कियों को भगाने की घटना आये दिन होने लगी है। अमीर लोग उन पर बुरी दृष्टि रखते उन्हें मौका देखकर हवस का शिकार बनाते आये हैं।
   इस मंहगाई के युग में माँ बाप अपनी संतानों को कैसे खिला पिलाकर बढ़ा करते हैं। उन्हें पढ़ाते लिखाते हैं । ये वही जानते है पेट काटकर एक एक पैसा जोड़कर बेटी के हाथ पीले करते हैं। ससुराल में भी इन बेटियों को दहेज के लिए सताया जाता है। आग से उन्हें जला दिया जाता है।
मानसिक रूप से सास ससुर देवर जेठ सभी अपमान करते हैं।
    कई परिवारों में सभी घर के लोग ऐसी गरीब बेटियों को मारते पीटते भी हैं। पति शराब पीकर आता है रोज गाली गलौच करता है वह शराब के लिए रुपये मांगता है। बेचारी असहाय सी अकेली तड़फती बच्चों को पालने के लिए सभी कुछ सहती रहती है।
  गरीब लड़कियां जब पति की मौत हो जाती है। तब वह विधवा हो जाती है। कोई श्रृंगार नहीं करती वह। समाज मे कोई शुभ कार्य होता तो उसे वहाँ खड़ा तक रहने नहीं देते। हमारी प्राचीन रूढ़ियों के कारण विधवाओं का मंगल कार्यों में आ जाना अशुभ माना जाता है। विधवा नए वस्त्र नहीं पहनती वह नाक कान हाथ पांवों में गहने आभूषण नहीं पहन सकती। मेंहन्दी आदि नहीं लगाती।
सारा जीवन नीरस तो होता ही है।
साथ ही जवान हुई विधवा पर सबकी नजर होती है। यदि वह नोकरानी का काम भी करे तो वहाँ भी उसके साथ शोषण हो सकता है। समाज में जहाँ भी वो जाएगी लोग सतायेंगे। उसकी गरीबी का फायदा उठाएंगे।
  वह गरीब लड़की आर्थिक रूप से कमजोर होती है। गरीब विधवा अपने छोटे बच्चों को छोड़ कहाँ जाएगी उसकी आड़ में घर परिवार समाज मे कार्य स्थल पर खेतों पर हर जगह उनका शोषण होता है।
  कई लोभी लोग धन कर लालच में तो कई हवस के भूखे भेड़िये ऐसी लड़कियों को सताते है।
कई लड़कियां अशिक्षित होती है जो थाने जाकर रिपोर्ट नहीं लिखा पाती।
  बहुत से ऐसे कारण है जिनके कारण विधवा लड़कियों को ससुराल में कई मुसीबतें अकेले ही सहन करनी पड़ रही है। उन्हें मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है।बीमार लड़कियों का उनके बच्चों का घर वाकई रुपये नहीं देते ,उपचार नहीं कराते हैं।
कवि राजेश पुरोहित

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