परिचर्चा:आखिर क्यों सताई जाती हैं-रमा प्रवीर वर्मा

आज जहाँ देश डिजिटल हो रहा है, विज्ञान के क्षेत्र में तरक्की कर रहा है और पुरुष ही नहीं महिलायें भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर देश की उन्नति में सहायक बन रही है वहीं देश के पिछड़े इलाकों में स्त्रियों की स्थिति अब भी दयनीय बनी हुई है | अशिक्षा और गरीबी इसकी मुख्य वजह है क्योंकि अशिक्षा के कारण लोगों का मानसिक विकास नहीं हो पाता जिसके कारण उसकी सोच नहीं विकसित होती |
गरीब तबके में महिलायें और लड़कियां प्रायः यौन शोषण और घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं | आर्थिक स्थिति से कमजोर होने के कारण कई माँ बाप अपनी बच्चियों की शादी अधेड़ उम्र के पुरुष से भी कर देते हैं क्योंकि वे दहेज देने में असमर्थ होते हैं और कई लोग तो अपनी लड़कियों को बेच भी देते हैं | लड़कियों को ससुराल भेज कर माँ बाप जैसे बोझ से मुक्त हो जाते हैं | गरीब परिवार की लड़कियों को विरोध करने का अधिकार नहीं होता है , भेड़ बकरियों की तरह जिस और धकेला जाता है वो चली जाती हैं, अशिक्षा के कारण वो अपने हक की लड़ाई लड़ने में असमर्थ होती है |
प्रायः सभी महिलायें इसे ही अपनी नियति मानकर जिंदगी जीती रहती है और ससुराल में प्रताड़ित होती रहती है | क्योंकि वे सोचती है की विरोध करने से कहीं उसकी शादी न टूट जाये , या उसके वैवाहिक रिश्तें पर कोई असर न पड़े या कहीं ससुराल से निकाल न दी जाये | क्योंकि इस स्थिति में वे लौट कर वापस अपने माँ बाप के ही पास जाएगी और उन पर बोझ बनेगी जो वे नहीं बनना चाहती है और सब कुछ सहती रहती हैं | मगर विधवा स्त्रियों की स्थिति तो ससुराल में और भी गंभीर होती है | ससुराल वाले भी विधवा बहू को बोझ समझने लगते हैं और उसके साथ दुर्व्यवहार करते हैं | संस्कृति, संस्कारों, रीतिरिवाजों के नाम पर उनका शोषण किया जाता है | अगर महिला के मायके वाले अमीर होते हैं तो इस स्थिति में या तो उसे मायके से आर्थिक मदद मिलती रहती है या वे खुद भी ससुराल छोड़कर मायके में जाकर रह सकती है | मगर गरीब घर की लड़कियों के साथ ऐसा नहीं होता है | विधवा होने के बाद भी ससुराल में रहना उसकी मजबूरी हो जाती है क्योकि उसके गरीब माँ बाप न तो उसे किसी तरह की आर्थिक मदद दे पाते हैं और न ही उसे वापस मायके ला पाते हैं | कई जगह तो यहाँ तक देखा गया है कि विधवा होने के बाद महिलाओं को विधवा आश्रम में भेज दिया जाता है |
लेकिन अब समय बदल रहा है। गैर-सरकारी संस्थाएं , सुलभ इंटरनेशनल इन विधवा महिलाओं के जीवन में खुशियां ला रहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट द्वारा विधवाओं के लिए बहुत सारे क़ानून भी बनाये गए हैं , बस जरूरत है तो सिर्फ इस बात की कि महिलाओं को इस जानकारी से अवगत कराया जाए |

रमा प्रवीर वर्मा
नागपुर, महाराष्ट्र

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