संसार में मानवीय विस्तार करेंगी लघुकथा संग्रह एक लोहार की: कान्ति शुक्ला।

श्री घनश्याम मैथिल अमृत का सद्य प्रकाशित और लोकार्पित लघुकथा संग्रह भेंटस्वरूप प्राप्त हुआ । संग्रह की समीक्षा मेरे विचारानुसार प्रस्तुत है.- साहित्य में मानव जीवन के समस्त पहलुओं की विवृत्ति होती है और यही […] Read More

कान्ति की कृति अनुरक्त- विरक्त’ का हुआ लोकार्पण।

वरिष्ठ साहित्यकार सुविख्यात कवयित्री कान्ति शुक्ला के कहानी संग्रह ‘ अनुरक्त- विरक्त’ का लोकार्पण दो जून को शहीद भवन भोपाल में सम्पन्न हुआ । इस कहानी संग्रह में आशा और आकांक्षा, उत्सुकता , संघर्ष और […] Read More

राष्ट्रीय कार्यशाला आयोजित

भोपाल । ‘साहित्यिक चोरी की रोकथाम एवं संदर्भ प्रबंधन पर मध्यप्रदेश के अग्रणी सेज विश्वविद्यालय एवं मध्यप्रदेश पुस्तकालय संघ द्वारा संयुक्त रूप से विद्वानों के लेखन, संदर्भ प्रबंधन और साहित्यिक चोरी की रोकथाम और शौध […] Read More

वाराणसी में मना उत्सव। दिल्ली तक खनक।

हिन्दुस्तानी भाषा अकादमी, दिल्ली और प्रगतिशील लेखक संघ, वाराणसी के संयुक्त तत्वावधान में ‘वाराणसी व्यंग्योत्सव’ – 2018′ का बेहद शानदार आयोजन रामछाटपार शिल्प न्यास, सामने घाट, बीएचयू, वाराणसी के सभागार में दिनांक 19 मई 2018 […] Read More

साहित्‍यकारों की दुनिया परिचर्चा आयोजन संख्‍या 6 के विजेता, 7 के लेखक, 8 का विषय।

साहित्‍यकारों की दुनिया पोर्टल पर होने वाले पाक्षिक आयोजन के फरवरी प्रथम आयोजन संख्‍या -6 में इस बार परिचर्चा का विषय था होली में ससुराल या होली में रसोई इसके के लिए, इस बार कुल […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार ‘ हेमलता गोलक्षा

किसी भी देश का सत्त विकास कृषि के बिना संभव नहीं है। कृषि और किसान का देश के उत्थान मे महत्वपूर्ण भूमिका  रहती है।  एक खुशहाल देश की नींव कृषि क्षेत्र का विकास और उत्पादन […] Read More

प्रदूषण की मार से बेहाल नदियॉं -: राघवेन्द्र कुमार राघव

नदियाँ हमारा रक्षण करने वाली हैं । नदियाँ अन्नोत्पादन में सहायक हैं । नदियों का जल अमृत रूप है । नदियाँ जीवन का आधार हैं फिर भी मनुष्य इन्हें मैला कर रहा है । वेद-वेदांग […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”दीपासंजय*दीप”

किसान उन्हें कहा जाता है,जो  खेती का काम करते हैं। इन्हें कृषक और खेतिहर भी कह सकते हैं। ये बाकी सभी लोगो के लिए खाद्य सामग्री का उत्पादन करते है भारत में लगभग 70% लोग […] Read More

किसना किसान -एक कहानी ”विवेक रंजन श्रीवास्तव”

किसना जो नामकरण संस्कार के अनुसार मूल रूप से कृष्णा रहा होगा किसान है ,पारंपरिक ,पुश्तैनी किसान । लाख रूपये एकड़ वाली धरती का मालिक इस तरह किसना लखपति है।मिट्टी सने हाथ ,फटी बंडी और […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” नमिता दूबे”

भारत एक कृषि प्रधान देश है पर कृषक और खेती-किसानी के लिये हमारे देश में बहुत कम काम हुआ है| नयीं तकनीक का अभाव,  खेती के लिये आज भी बारिश पर निर्भरता, मिट्टी की गुणवत्ता […] Read More