साहित्‍यकारों की दुनिया परिचर्चा आयोजन संख्‍या 6 के विजेता, 7 के लेखक, 8 का विषय।

साहित्‍यकारों की दुनिया पोर्टल पर होने वाले पाक्षिक आयोजन के फरवरी प्रथम आयोजन संख्‍या -6 में इस बार परिचर्चा का विषय था होली में ससुराल या होली में रसोई इसके के लिए, इस बार कुल […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार ‘ हेमलता गोलक्षा

किसी भी देश का सत्त विकास कृषि के बिना संभव नहीं है। कृषि और किसान का देश के उत्थान मे महत्वपूर्ण भूमिका  रहती है।  एक खुशहाल देश की नींव कृषि क्षेत्र का विकास और उत्पादन […] Read More

प्रदूषण की मार से बेहाल नदियॉं -: राघवेन्द्र कुमार राघव

नदियाँ हमारा रक्षण करने वाली हैं । नदियाँ अन्नोत्पादन में सहायक हैं । नदियों का जल अमृत रूप है । नदियाँ जीवन का आधार हैं फिर भी मनुष्य इन्हें मैला कर रहा है । वेद-वेदांग […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”दीपासंजय*दीप”

किसान उन्हें कहा जाता है,जो  खेती का काम करते हैं। इन्हें कृषक और खेतिहर भी कह सकते हैं। ये बाकी सभी लोगो के लिए खाद्य सामग्री का उत्पादन करते है भारत में लगभग 70% लोग […] Read More

किसना किसान -एक कहानी ”विवेक रंजन श्रीवास्तव”

किसना जो नामकरण संस्कार के अनुसार मूल रूप से कृष्णा रहा होगा किसान है ,पारंपरिक ,पुश्तैनी किसान । लाख रूपये एकड़ वाली धरती का मालिक इस तरह किसना लखपति है।मिट्टी सने हाथ ,फटी बंडी और […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” नमिता दूबे”

भारत एक कृषि प्रधान देश है पर कृषक और खेती-किसानी के लिये हमारे देश में बहुत कम काम हुआ है| नयीं तकनीक का अभाव,  खेती के लिये आज भी बारिश पर निर्भरता, मिट्टी की गुणवत्ता […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” शिवानंद चौबे

कृषि प्रधान देश भारतवर्ष में यदि अन्नदाता ही आत्महत्या करने को विवश है तो निश्चय ही यह इस देश के लिए शर्मनाक बात है !हम शायद यह बात भूल जाते है की हम कितने भी […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार”राजीव नामदेव ‘राना लिधौरी”

कुछ समय से सूखा की स्थिति बनी हुई है और फिर अभी हाल ही में बेमौसम बरसात एवं ओलों की मार से किसान पूरी तरह से टूट गया है उनकी पूरी फसलें बरबाद हो गयीं […] Read More

परिचर्चा सं0 7- तड़पते किसान और सरकार” धीरेन्द्र प्रताप सिंह।

भारत ने बीसवीं सदी के अंतिम दशक में हुए आर्थिक बदलावों (नई आर्थिक नीति-1991) से एक बहुत ही तेज रफ़्तार से इक्कीसवीं सदी में प्रवेश किया. इस तेज रफ़्तार ने सुविधा के नाम पर देश […] Read More

परिचर्चा- तड़पते किसान और सरकार ” रीता जयहिन्‍द” आयोजन संख्‍या -7

हमारे किसान जो कि कितनी कड़ी मेहनत से अन्नोपार्जन करते हैं ।खेतों में कड़ी धूप व बंजर जमीन को उपजाऊ करते हैं तब हम लोगों तक अन्न पहुँचता है। कितनी दुःखद बात है जिस किसान […] Read More